श्रीमद् भागवत कथा मानव जीवन में हृदय के संशयों को करती है दूर : आचार्य कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज

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आचार्य कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी महाराज
बस्ती. कप्तानगंज, टिनिच रोड, नकटी देई बुजुर्ग में श्री मद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के पहले दिवस की बैठक का शुभारंभ कल दिनांक 21नवंबर को हुआ। कथा में मुख्य यजमान करिया बाबा ने श्री मद्भागवत जी का पूजन करवा कर ठाकुर जी का आशीर्वाद प्राप्त किया। श्री मद्भागवत कथावाचक कौशलेंद्र कृष्ण शास्त्री जी ने अमृतमयी वाणी से श्री मद्भागवत कथा प्रेमियों को प्रथम दिवस की कथा में प्रवेश कराते हुये प्रथम श्लोक सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पयादि हेतवे, तापत्रय विनाशाय श्री कृष्ण वयं नम: ।”की व्याख्या करते हुए भक्तों को सुकदेव जी के जन्म की कथा का वृतांत सुनाया।

महराज जी ने कहा कि सुखदेव जी माता के गर्भ से जन्म लेते ही वन में चले गए। ऐसे सर्वभूत श्री सुखदेव जी जिन्हें ये भी नहीं पता कि स्त्री और पुरुष में क्या भेद है। जिनके पिता श्री वेद व्यास जी उन्हें मिलने के लिए जंगल गए और पुत्र-पुत्र कहते हुए थक गए। तब तरु यानि वृक्षों ने कहा कि कौन किसका पुत्र और कौन किसका पिता? वेद व्यास जी आप जिनको अपना पुत्र कह रहे हैं, वो तो कभी आपका पिता था। ऐसे शब्दों को श्रवण करने से वेद व्यास जी को सत्य का ज्ञान हो गया और वो सुखदेव जी को बिना साथ लिए ही वापस चले आए। अचार्य कौशलेंद्र महाराज जी ने संगीतमय कथा में अपने मधुर स्वर से आगे के प्रसंगों के माध्यम से भावविभोर श्रोताओं को बताया कि परीक्षित जी के जन्म प्रसंग, कुंती स्तुति, भीष्म स्तुति, राजा परीक्षित जी का सुखदेव जी की सभा में आगमन, सधोमुक्ति का वर्णन के बारे में बताया।

महराज ने श्री मद्भागवत कथा का परिचय देते हुए कहा कि श्री मद्भागवत कथा मानव जीवन का आधार है। श्री मद्भागवत ह्रदय के संशयों को दूर करती है। इस दौरान हरिनाम संकीर्तन कर ठाकुर जी का गुणगान किया। ठाकुर जी की आरती के साथ प्रथम दिवस की कथा को विश्राम दिया गया
कार्यक्रम की रूपरेखा करिया बाबा बताते हुए कहा कि 28 नवम्बर तक चलने वाली अमृतमयी कथा में 25/26 नवम्बर को बादल सावंरिया की दिव्य विशेष झांकी का आयोजन किया जायेगा ।