देवउठनी एकादशी: कोरोना काल में पहली बार बारातें निकलेंगी, ऐसे मिलेगी परमिशन

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स्वप्निल जैन

शिवपुरी/खनियांधाना
पहली बार कोरोना काल में 25 नवंबर से सड़कों पर बारात निकल सकेंगी लेकिन इसके लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। लोगों की खुशियों को देखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया है कि शादियों में बारात निकालने की अनुमति भी दी जाएगी लेकिन इसमें कोविड गाइड लाइन का पालन करना होगा। यदि नहीं माने तो मैरिज गार्डन संचालक के साथ वर-वधू के अभिभावक भी कार्रवाई की चपेट में आएंगे।

आगामी 25 नवंबर से शादियों के मुहूर्त शुरू हो रहे हैं। ऐसे में शादियों में लोगों की भीड़ जुटने की उम्मीद है। शादी करने वाले परिवारों का कहना है कि प्रशासन को अब अनुमति पूरी तरह से देनी चाहिए। जिस घर में शादी है वह अपने यहां पूरी तैयारी कोविड से बचाव की रखेगा। इसलिए प्रशासन आगामी शादियों को देखते हुए फिर से गाइड लाइन की तैयारियों में जुटा है।

कोरोना काल में शादियों के लिए किन नियमों का पालन करना जरूरी

कलेक्टर अक्षय कुमार सिंह का कहना है कि जिस घर में शादी होती है और जो लोगों को अपनी खुशियों में शामिल होने बुलाता है। दरअसल सारी जवाबदारी उसी की होती है। चूंकि शादी में निकटतम रिश्तेदारों के साथ मिलने जुलने वाले और अति घनिष्ठ लोग शामिल होते हैं। तो फिर आयोजकों की ही यह जिम्मेदारी है कि वह पूरी तरह से कोरोना गाइड लाइन का पालन करें। प्रशासन तो नियमावली लागू कर सकता है जब तक लोगों का सहयोग उसे नहीं मिलेगा तो फिर वह कैसे कोरोना जैसी घातक बीमारी से बचा सकेगा। इसलिए गाइड लाइन का अक्षरश: पालन करना आयोजक की जिम्मेदारी है।

बारात का स्वागत सैनिटाइजर से होगा

जिस जगह शादी आयोजित होगी, उस जगह के प्रवेश द्वार पर विवाह आयोजक को सेनेटाइजर और मास्क की व्यवस्था रखनी होगी ताकि लोग शादी घर में प्रवेश के दौरान सुरक्षित और मास्क पहनकर ही प्रवेश कर सकेंगे। इसके साथ ही कुछ लोग इस दौरान बिना मास्क के भी शादी में आएंगे उनके लिए आयोजकों को गेट पर ही मास्क रखने होंगे और सेनेटाइजर की व्यवस्था के लिए एक अलग से आदमी नियुक्त करना होगा ताकि शादी में आने वाले व्यक्ति की पूरी सुरक्षा रहे।

जितनी बड़ी जगह, उससे आधी क्षमता के लोग ही होंगे शामिल

वर-वधू के अभिभावकों को शादी की अनुमति देते समय प्रशासन यह निगरानी कर रहा है कि वहां लोगों की क्षमता कितनी है और कितने लोगों को वह बेहतर व्यवस्थाएं दे सकते हैं। इसके तहत मान लो किसी शादी घर में 200 लोगों की सोशल डिस्टेंस के साथ बैठने की क्षमता है तो वहां 100 लोगों की ही विवाह करने के लिए अनुमति दी जाएगी। इससे अधिक लोग वहां शामिल होते हैं तो फिर यह आयोजकों और मैरिज गार्डन संचालक की जिम्मेदारी रहेगी।

शादी की अनुमति लेना जरूरी वर-वधू के दस्तावेज देना होंगे

एसडीएम शिवपुरी अरविंद वाजपेयी के अनुसार शादी के लिए अनुमति विवाह करने वाले दोनों वर-वधू पक्ष को लेनी होगी। इसमें वर-वधू की शादी का कार्ड, उनकी मार्कशीट (जन्मतिथि के लिए) आधार कार्ड, मैरिज गार्डन का नाम जहां से शादी हो रही है और सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना गाइड लाइन का शपथ पत्र को देना होगा। आवेदन देने के अगले दिन ही अनुमति मिल जाएगी लेकिन दस्तावेज और जानकारी पूरी और सही देनी होगी।

बाराती नाच सकेंगे, पर कोविड गाइड लाइन का पालन करना होगा

कोरोना काल में बैंड की धुन पर पहली बार बाराती नाच सकेंगे। अभी यह गाइड लाइन तैयार हुई है लेकिन बारात में सीमित लोग ही शामिल हो सकेंगे और दूरी बनाकर दूल्हे के साथ बारात में चलना होगा। ज्यादा लंबा प्रोसेशन नहीं निकालेंगे। शादी घर के आसपास ही बारात निकले इसकी व्यवस्था करनी होगी। लोग खुशियां मनाने के लिए नाच तो सकेंगे, बैंड बजा सकेंगे लेकिन उन्हें सोशल डिस्टेंस और कोविड गाइड लाइन का पालन खुद करना होगा। ताकि कोरोना का संक्रमण न फेले।

2021 में 25 अप्रैल को विवाह का पहला मुहूर्त

15 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में आने से खरमास जिसे मलमास भी कहते है, शुरू हो जाएगा, जो 14 जनवरी 2021 तक रहेगा। मलमास में विवाह आदि शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं। इसके बाद 19 जनवरी को गुरु तारा अस्त हो जाएगा और 16 फरवरी तक अस्त ही रहेगा।गुरु ग्रह अस्त होने पर भी शुभ विवाह नहीं होता है। 16 फरवरी से 17 अप्रैल तक शुक्र ग्रह अस्त रहेगा। इस कारण 11 दिसंबर के बाद अगले 4 महीने तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं रहेंगे। नए साल में 25 अप्रैल 2021 को साल का पहला शुभ मुहूर्त होगा।

तभी शादियां व शुभ कार्य शुरू होंगे। तब तक लोगों को इंतजार करना पड़ेगा। यह पूरा क्रम जनवरी से लेकर मार्च तक चलेगा। इसके बाद 25 अप्रैल से ही विवाह के शुभ मुहूर्त होंगे। इस साल 11 दिसंबर को अंतिम मुहूतर्: देव उठने के साथ शुरू होने वाले सहालग सीजन में शादी के लिए 8 लग्न और शुभ मुहूर्त है। 11 दिसंबर को शादी के लिए अंतिम मुहूर्त रहेगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी।

ऐसा ग्रहों के अस्त होने व मलमास लगने के कारण होगा। वहीं 16 फरवरी को बसंत पंचमी और 15 मार्च को फुलेरा दौज का अबूझ मुहूर्त रहेगा। अभी पांच महीने से मांगलिक कार्यों पर है रोक: देवउठनी एकादशी पर 25 नवंबर को मंदिरों में देव जागरण होगा। जिले में इस दिन तुलसी-सालिगराम विवाह सहित कई मांगलिक आयोजन होंगे। इसी के साथ अधिकमास और चातुर्मास के चलते 5 माह से मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी और शादी समारोह शुरू हो जाएंगे।

15 दिसंबर से फिर बंद हो जाएंगे विवाह
15 दिसंबर से 14 जनवरी तक मलमास चलेगा। 17 जनवरी से 15 फरवरी के बीच देव गुरु अस्त रहेंगे। यह पूरा क्रम जनवरी से लेकर मार्च तक चलेगा। इसके बाद 25 अप्रैल से ही विवाह के शुभ मुहूर्त होंगे।