इकाइयों की देखभाल में प्रतिवर्ष करोड़ों खर्च फिर भी शहर में उड़ रही राख

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 आशीष उघड़े की रिपोर्ट 

सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में प्रतिवर्ष इकाइयों के मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपया खर्च किये  जाते  है, करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जब इकाइयों को चालू किया जाता है तो चिमनी से ज्यादा धुआं बॉयलर से निकलता है। धुंए के साथ-साथ बड़ी मात्रा में कोयले की राख भी शहर में फैलती है। जिस वजह से शहर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही है ‌।

लोगों को सांस लेने में तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है वहीं सड़कों पर चलने वाले लोगों की आंखों में राख जाने की वजह से हर पल हादसा होने की आशंका बनी हुई है। इसी के साथ पर्यावरण में भी इसके घातक परिणाम हो रहे हैं। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारणी में अधिकारियों से सांठगांठ करके ठेकेदार गुणवत्ता हीन काम करते हैं जिसका नतीजा जनता और पर्यावरण को भुगतना पड़ रहा है, गौरतलब है कि लंबे समय से प्लांट की 6 और 7 नंबर  बंद थी, उसके बाद भी लाइटअप किये जाने के बाद उनके मेंटेनेंस में लापरवाही नजर आई है। जिसका परिणाम विगत रात्रि से दूसरे दिन शाम तक काला धुंआ उठता रहा। बता दे की कोरोना काल में हवा में आक्सीजन को प्रभावित करना दंडनीय अपराध है।