IUMS के विरोध में अभाविप ने राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा

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रविकांत बिदौल्या 

हटा/ मध्यप्रदेश में सभी 21 शासकीय विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को डिजिटल मोड ऑटोमेशन में लाने के उद्देश्य से एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है। इस प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के 24 लाख विदयार्थियों का अकादमिक डाटा,विश्वविदयालय के समस्त कर्मचारी और प्राध्यापकों का रिकार्ड एक ही प्लेटफार्म पर एकत्रित होगा। साथ ही विश्वविद्यालयों की दिन-प्रतिदिन की गतिविधिया परीक्षा नियत्रण सिस्टम और अकाउंट भी इसके दायरे में आ जाएगा। लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति व मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अनुसार सभी विश्वविद्यालय अकादमिक व प्रशासनिक दृष्टिकोण से के स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य कर सकते हैं। और IUMS की प्रणाली इसके पूर्णतः विपरीत है। सभी विश्वविद्यालयों का नियंत्रण किसी एक विश्वविद्यालयों के पास रहेगा तो एकाधिकार की समस्या रहेगी। इसमें डेटा हैकिंग से संबंधित कई बड़े खतरे हैं।  जिला सहसंयोजक हर्षप्रतीक कुष्मारिया ने IUMS से छात्रों को होने वाली समस्याओं को बताते हुए बताया कि- सभी विश्वविद्यालयों की व्यवस्था को केन्दित करना, सूचनाओं को एक ही जगह एकत्रित करना अव्यवहारिक और अनावश्यक कदम है इसमें डेटा हैकिंग से संबंधित कई बड़े खतरे हैं। प्रान्त कार्यकारिणी सदस्य गर्वेश राजपूत ओर जिला सहसंयोजक हर्षप्रतीक कुसमरिया ने बताया कि- सभी विश्वविद्यालयों का नियंत्रण किसी एक विश्वविद्यालय के पास रहेगा तो एकाधिकार की समस्या रहेगीl, सभी 21 विश्वविद्यालयों के छात्रों व प्रधापकों के एकाउंट की जानकारी ऐसे केंद्रित करने से धोखाधड़ी की संभावना बढ़ जाएगी।,

मध्यप्रदेश में आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में हर जगह इंटरनेट की सुविधा नहीं है, साथ ही सभी विश्वविद्यालयों के पास इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी का पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है। इस प्रकार से फिर IUMS की ऑनलाइन प्रणाली से सभी छात्र कैसे जुड़ पाएंगे।,
साथ ही सभी विश्वविद्यालयों के छात्रों की न तो सहमति थी न ही विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद से परिचर्चा की गई, फिर इस प्रकार किसी तानाशाही प्रणाली को लागू करना बिल्कुल भी उचित नहीं है।