लम्पी बीमारी का कहर, एक दूसरे के संपर्क में आने से बढ़ रही बीमारी बीमार मवेशियों को भी चौदह दिन अलग रखने की दी जा रही सलाह

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दिलीप पाल
आमला। लोगों में कोरोना का कहर खत्म हुआ भी नहीं हुआ है कि मवेशियों को लम्पी नामक बीमारी ने जकडऩा शुरू कर दिया है। यह बीमारी भी कोरोना की तरह ही है जो एक दूसरे के संपर्क में आने से फैल रही है। पशु विभाग के डाक्टर बीमार पशुओं को १४ दिनों तक अलग रखने की सलाह दे रही है ताकि उनका उपचार किया जा सके। हालांकि मवेशियों में फैली इस बीमारी की दवा पशु चिकित्सालय के पास नहीं है। उन्होंने दवा उपलब्ध कराने की मांग शासन से की है। जब तक दवाइयों की खेप नहीं आ जाती है तब तक एंटीबायटिक दवाओं से काम चलना पड़ रहा है। इसी बीमारी के लक्षण मवेशियों के घुटने में सूजन आना और शरीर पर ददोड़े उठना है। दरअसल लम्पी नामक बीमारी तेजी से गांव में फैल रही है। अब तक इस बीमारी से दो दर्जन से अधिक मवेशी पीडि़त है। शुरुआती दौर में तो पशु पालक मवेशियों का घरेलू उपचार करा रहे थे। इसके बाद उन्होंने निजी पशु चिकित्सकों से इलाज कराया पर कोई फायदा नहीं हुआ। मवेशियों की स्थिति दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है। हालांकि मामले की जानकारी लगते पशु चिकित्सा विभाग के डाक्टरों द्वारा इस ओर सक्रियता से काम किया जा रह है। विभाग के अधिकारियों द्वारा पशुपालकों को बीमार पशुओं को चौदह दिनों तक अन्य मवेशियों से दूर रखने की सलाह दी जा रही है।
बीमारी के लक्षण
-लम्पी बीमारी के शुरुआती दौर में मवेशियों पर ददोड़े दिखाई देने लगते हैं।
– धीरे धीरे पैरों में सूजन आने लगती है औ दर्द होता है।
– समय पर इलाज नहीं मिलने पर घाव पर कीड़े लगने लगते हैं।
– यह बीमारी एक मवेशी से दूसरे मवेशियों में फैलती है।

वैक्सीन की कमी
फिलहाल मवेशियों में फैले इस रोग की वेक्सिन पशु विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। वर्तमान में पशु चिकित्सालय की टीम एंटी बायोटिक और दर्द की दवाइयां देकर मवेशियों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने शासन से वैक्सिन की मांग की है। पशु विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लम्पी नामक बीमारी एक प्रकार का वायरस है जो एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है। इसकी दवा

बीमार पशुओं को अलग रखने दे रहे सलाह
मरिया लाल, खंड पशु चिकित्सा अधिकारी का कहना है कि ब्लॉक क्षेत्र में पशुओं पर महामारी की बीमारी आने की शिकायत मिली है। एक प्रकार से वायरस है। इसका इलाज फिलहाल तो हमारे द्वारा किया जा रहा है लेकिन जब तक वैक्सीन नहीं आएगा तब तक पशुओं का इलाज संभव नहीं हैञ लम्पी बीमारी पशुओं के शरीर में ददोड़ेे होने आ जा रहे हैं। पैरों में सूजन आ रही है समय पर इलाज ना मिलने के कारण होने वाले घाव पर कीड़े लगने लगते हैं। पशु एक दूसरे के संपर्क में आने से लम्पी के मरीज बढ़ रहे हैं। किसानों को और पशुपालकों को समझाइश दी गई है कि पशुओं को अलग अलग रखें और 14 दिन तक उन्हें अलग रखें उनका उपचार कराएं फिलहाल अभी एंटीबायोटिक और दर्द की दवाई दी जा रही है शासन से वैक्सिंग की मांग की गई है।