फिर से पलायन का दंश झेलता आदिवासी अंचल, रोजगार न मिलने से बाहर जाने जो मजबूर

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प्रवीण मलैया ब्यूरों 

घोड़ाडोंगरी तहसील मैं बड़े उद्योग धंधे ना होने के कारण यहां के रहवासी यहां से दूर अपने परिवार को छोड़कर दूसरे राज्य या दूसरे जिले में रोजगार के लिए जाना पड़ता है। किंतु जब से देश में कोरोना महामारी ने दस्तक दी है तब से पूरे भारत देश में बड़े-बड़े उद्योग धंधों पर कोरोना  की मार पड़ी है। घोड़ाडोंगरी से रोजगार के लिए दूसरे राज्य या दूसरे जिले में गए लोगों को अपने घर वापस आना पड़ा।
यहां आने के बाद जैसे तैसे 2 से 3 महीने पंचायत द्वारा मनरेगा या दूसरे कार्य को कर अपना भरण पोषण किया किंतु कुछ महीने से रानीपुर क्षेत्र के आसपास स्थित पंचायतों में कोई भी कार्य ना होने के कारण यह लोग बेरोजगारों हो गए हैं। जिसका असर उनके परिवार के पालन पोषण पर पड़ रहा है।
रोजगार ना होने के कारण यह लोग फिर से अपने गांव छोड़ने को तैयार हो गए हैं। और दूसरे जिले या दूसरे राज्य में रोजगार के लिए पलायन कर रहे हैं।
कोरोना महामारी मैं इस समय बड़ा ही विकराल रूप धारण कर लिया है जिससे नेता, अभिनेता कोई भी अछूता नहीं रहा है इसके बावजूद भी यह लोग अपनी जान की परवाह किए बिना परिवार के पालन पोषण के लिए अपने घर से दूर दूसरे राज्य दूसरे जिले में रोजगार के लिए जा रहे हैं।
जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी के अंतर्गत आने वाली 56 ग्राम पंचायतों में रानीपुर क्षेत्र की लगभग सभी ग्राम पंचायतों में मजदूरों को काम नहीं मिलने के कारण अन्य जिले में पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है।

इनका कहना है –
विगत वर्षों में भी हमें इस प्रकार की जानकारी मिली थी ।
जब हमारे द्वारा जानकारी निकालते हैं इनको यहां पर मजदूरी कम मिलती है और बाहर इनको अच्छी मजदूरी होने के कारण यह बाहर जाते हैं। वरना पंचायतों में पर्याप्त मनरेगा के कार्य खोल रखे हैं। और जल संरक्षण एवं जल संवर्धन के कार्य वर्षा ऋतु के बाद ही प्रारंभ होंगे।
आज की तारीख में घोड़ाडोंगरी विकासखंड में 4200 लेबर कार्य कर रहे हैं
रानीपुर एरिया सिंचित एरिया होने के कारण वहां पंचायत के कार्य के लिए भूमि भी कम है एवं वहां बड़े डैम होने के कारण हम कोई बड़े स्तर या गहरी खुदाई के कार्य वहां नहीं कर सकते ।
फिर भी रानीपुर के आसपास हमारे द्वारा छोटे कार्य पंचायतों में निकाले जाते हैं

जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी
सीईओ दानिश अहमद खान