राजस्व विभाग व वन विभाग अवैध उत्खनन रोकने में विफल, रेत माफियाओं के हौसले बुलंद,रातो रात होती है रेत गायब

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प्रवीण मलैया
रानीपुर- बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी तहसील क्षेत्र में अवैध उत्खनन करने वाले रेत माफियाओं की तादाद में बढ़ोतरी दिन प्रतिदिन होती जा रही है । अवैध रेत माफिया खेतों, नदियों, नालो और जंगलों से अवैध रेत निकालने में लगे है वही खनिज अधिकारी व वन अधिकारी भी अवैध उत्खनन रोकने में नाकाम साबित हो रहे है। नगरपालिका क्षेत्र सारनी से 3 किलोमीटर स्थित मोरडोंगरी नदी से माफिया रातो रात रेत गायब कर लेते है और प्रशासन को इसकी भनक भी नही लगती या सब जानकर भी अनजान रहती है सरकार । सही शब्दो मे कही जाए तो राजस्व विभाग और वन विभाग से साथ-गाँठ करके उत्खनन किया जा रहा है । उत्खनन करने में रेत माफिया के साथ अधिकारी की भी मिलीभगत साफ देखी जा सकती क्योंकि कार्यवाही के नाम पर खाना पूर्ति करना विभाग को अच्छी तरह आता है।


सारणी बाकुड़ से कैसे होती है नदियों से रेत चोरी ?
रेत माफ़ियाओ की समय सीमा बनी होती है। सुबह 4 बजे से नदियों में जाकर रेत उत्खनन करते हैं कुछ दूरी में प्रशासन की नजर में न आने के लिए दूत बनाकर बैठाकर अवैध रेत उत्खनन करते हैं। सारनी से महज किलोमीटर दूर स्थित ग्राम मोरडोंगरी, बाकुड़, दुलारा, डांगवा जामखो दर आम डाना अन्नका वाड़ी 4 गांव रतनपुर महक।र केरिया गाव की नदियों से रेत उत्खनन की जाती है। और सड़क किनारे एकत्रित कर ट्रालियों से सप्लाई की जाती है।
राजस्व विभाग कार्यवाही के नाम पर करता है मुह दिखाई
रोजाना सैकड़ों वाहन से नदी नालों से रेत लेकर जाते हैं। अगर सूचना मिलती भी है विभाग को तो कार्यवाही करने का हवाला दे कर अगले दिन टाल दिया जाता है। वही सूत्रों की माने तो कार्यवाही के नाम पर मामले को भी ले देकर रफादफा कर दिया जाता है। यदि कार्यवाही की बात की जाए तो राजस्व विभाग ही नही वन विभाग भी कार्यवाही करने से पीछे छूट जाते हैं और जानकारी नही होने का हवाला देकर मामला दबा दिया जाता है