हम अपनी एकता को बरबाद न करें – डॉ. मोदी

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आशीष उघड़े 

सारनी। 22 सितम्बर 2020 मंगलवार भारत के श्रमिक वर्ग से लिए अंधकार दिवस के रूप में आया ऐसा कहते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णा मोदी ने प्रेस नोट जारी की। डॉ. मोदी ने बताया कि दिल्ली में देश के सभी विधान सभा सदस्यों को द्वारा चुने गये राज्य सभा सदस्यों ने विपक्षों के आग्रह को ठुकराते हुए सदन के अध्यक्ष महोदय ने ध्वनियंत्र के माध्यम से देश के बनाये गये 40 से ज्यादा श्रमिक कानूनों के जगह पर श्रमिक कोड बिल को पास कर दिया। जिससे श्रमिकों के मिले हुये समस्त अधिकार समाप्त हो गये। जिसमें से पहला वह अधिकार था कि देश के अन्दर कोई भी उद्योग धंधे की कम्पनी जिसमें 300 से ज्यादा श्रमिक कार्य करते है। जो भारत सरकार के अनुमति के बाद ही बंद कर सकती थी। तथा यदि कोई कम्पनी को हानि हो नहीं तो उसे BFIR से मंजूरी लेनी होती थी अब यह नये कोड बिल के अनुसार समाप्त हो गये और कोई भी कम्पनी किसी भी श्रमिक को कभी भी नौकरी से निकाल सकती है। इसके अलावा श्रमिक संगठन भी प्रजातांत्रिक तरीके से निर्माण नहीं किया जा सकता। आगे चलकर जो भी सामाजिक सहुलियतें जैसे-साप्ताहिक अवकाश, बीमारी अवकाश, आकस्मिक अवकाश, वेतन वितरण, किसी भी किस्म को बोनस, ग्रेज्युटी, नौकरी की शर्ते, दुर्घटना क्लेम, पेंशन आदि अप कम्पनी मनमर्जी पर रहेगा। यह सब देश की आजादी के बाद श्रमिकों ने समय समय पर अपनी एकता के आधार पर राज्य एवं केंद्र सरकार से बनाया था। यह इसलिये भी हुआ कि उस समय हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि ने हमारी तकलीफों एवं दिक्कतों को देखते हुए राज्य सभा, लोक सभा, विधान सभा में हमारे पक्ष में मतदान दिया अब समय आ गया कि हमारे चुने हुये जनप्रतिनिधिगण चुपचाप हमारे अधिकारीन, हमारे अधिकार को खत्म करने के लिये चुपचाप सहमति प्रदान किया है। अभी शायद तुरन्त इसका फल नही मिलेगा परन्तु जिस प्रकार जंगल को साफ करने के लिये एक एक वृक्ष को अलग अलग किया जाता है। उसी प्रकार हममें से एक-एक व्यक्ति के उपर हमला होगा और उस समय हम वही कहेंगे की ये हमला हमारे पड़ोसी घर हो रहा है हम पर नहीं हो रहा। यही सोच आज से दो सौ वर्ष पहले औद्योगिक संस्थानों पर हुआ करती थी जिसे हमारे ही मेहनत कश लोगों की आंखे और दिमाग खुला तब एकता बनाकर यह सब हासिल किया है। इस सरकार की जन विरोधी नीति को खत्म करने के लिये पानी अलग अलग विचारधारा वाले श्रमिक संगठनों को एकता बनाने के लिये विवश होना ही पड़ेगा।