अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस पर ऑनलाइन पोस्टर, स्लोगन एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन

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मनीष मालवीय ब्यूरो
होशंगाबाद इटारसी // शासकीय कन्या महाविद्यालय, इटारसी की छात्राओं द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस पर ऑनलाइन पोस्टर, स्लोगन एवं निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
प्रचार्य डॉ. कुमकुम जैन बताया कि साल 1985 में सबसे पहले ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में एक बड़े छेद की खोज की थी तथा इसकी जिम्मेदार क्लोरोफ़्लोरोकार्बन (CFC) गैस है। ओजोन परत, गैस की एक नाजुक ढाल है। पृथ्वी को सूर्य की किरणों के हानिकारक प्रभाव से बचाकर यह हमारे ग्रह पर हमारे जीवन को संरक्षित रखने में हमारी मदद करती है।


डॉ. संजय आर्य ने बताया कि इस वर्ष की थीम ”जीवन के लिए ओजोन” है। ओजोन दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य ओजोन परत के संरक्षण के लिए लोगों को जागरुक करना है। ओजोन परत ओजोन अणुओं की एक परत है जो 20 से 40 किलोमीटर के बीच के वायुमंडल में पाई जाती है। ये पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक अल्ट्रा वाइलट किरणों से बचाने का काम करती है। ओजोन परत के बिना जीवन संकट में पड़ सकता है, क्योंकि अल्ट्रा वाइलट किरणें अगर सीधा धरती पर पहुंच जाए तो ये मनुष्य, पेड़-पौधों और जानवरों के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकती है, ऐसे में ओजोन परत का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है।


डॉ. आर. एस. मेहरा ने बताया कि ओजोन परत को इंसानों द्वारा बनाए गए कैमिकल्स से काफी नुकसान होता है। ओजोन परत के बिगड़ने से जलवायु परिवर्तन हो रहा है, ऐसे में अब गंभीर संकट को देखते हुए दुनियाभर में इसके संरक्षण को लेकर जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है।इसलिए हमें प्रण लेना चाहिए कि हम अपने पृथ्वी कि रक्षा के लिए हर महत्वपूर्ण कोशिश करेंगे। प्रदुषण को रोकेंगे, बिजली कि बचत करेंगे, और रीसाइक्लिंग कि मदद से पुराने चीजों का पुनः इस्तेमाल करेंगे जिससे हमारी पृथ्वी सुरक्षित, सुन्दर और स्वच्छ बनी रहे।

पोस्टर प्रतियोगिता में

प्रथम कु. दीपिका जनोरिया, द्वितीय कु. पैरिशा पटैल व अदिति पटैल एवं तृतीय स्थान कु. वैशाली दास ने प्राप्त किया।

स्लोगन प्रतियोगिता में

प्रथम कु. रितिका कुल्हारे, द्वितीय कु. रूपा कुमारी व खुशबू रैकवार, तृतीय स्थान कु. वंशिका राय ने प्राप्त किया।

निबंध प्रतियोगिता में

प्रथम कु. सुरभि मालवीय, द्वितीय कु. वैष्णवी राजपूत व कु. शिखा यादव एवं तृतीय स्थान कु. मानसी पटैल, सिमरन अहिरवार एवं दुर्गंशा सोलंकी ने प्राप्त किया।