मेरा लक्ष्य तो सूबे की और यहाँ के लोगो की तस्वीर बदलना -राज्य प्रशासनिक सेवा छोड़ राजनीति में आये

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चंद्रमणि विश्वकर्मा 

एक साधारण से गरीब आदिवासी परिवार में जन्म लिया मेरी भी परवरिश ठीक उसी तरह से हुई जैसे मेरे क्षेत्र में अन्य आदिवासी या सामान्य श्रेणी के गरीब परिवारों के बच्चो की होती है बस मेरे माता पिता ने मुझे अच्छे संस्कार और विद्या दिलाई जो आजभी मेरे मन मे है मैं राज्य प्रशासनिक सेवा में 15 साल पहले आया उसके पहले भी छोटी बड़ी नौकरियां की मैने  कभी भी किसी काम को छोटा नही माना चाहे वो कैसा भी काम क्यों न रहा हो इस नौकरी में आने के बाद मैंने जीवन के संघर्ष के कई रूप देखे गरीब को और गरीब होते,अमीर को और अमीर होते देखा कई बार चाहते हुए भी मैं कमजोर लोगो की सेवा नही कर सकता था क्योंकि शासन  से हमारे हाथ सीमित व बंधे हुए होते है और जनप्रतिनिधियों के मैंने उन गरीबो का शोषण करते देखा जीवन को बस जीना ही इन लोगो के लिए विकास हो गया है इसलिए मेरा मन कई बार व्यथित हुआ जीवन को जब हम त्याग करे तो कुछ ऐसा कर के जाएं कि हमारे द्वारा किये कार्य कई परिवार के जीवन को रोशन कर सके इसीलिए मैंने अब अपना पद त्यागना ही सही समझा राजनीति तो एक पड़ाव है मेरा लक्ष्य तो सूबे की और यहाँ के लोगो की तस्वीर बदलना है कई विचार है मेरे मन मे जो समय आने पर सभी अवगत करवाऊंगा अभी बस आपसे यही कह सकता हूँ समय आने दीजिये ये वक़्त बतलायेगा की विकास किसे कहते है ।
जय हिंद आपका अपना बेटा रमेश।

रमेश सिंह राज्य शासन को अपना स्तीफा भेजा था जो मंजूर हो चुका है