प्रशासनिक प्रतिबंध के बावजूद दिन दहाड़े धड़ल्ले से किया जा रहा रेत का अवैध कारोबार

Scn news india

दिलीप पाल
आमला। इन दिनों आमला में रेत का अवैध कारोबार जमकर फल-फूल रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में नियम कायदों को ताक पर रख कर रेत माफियाओ द्वारा दिन दहाडे रेत का अवैध खनन व परिवहन किया जा रहा है।
आमला सारणी के बीच बाकुड क्षेत्र ओर जम्बाड़ी बोरदेही,लालावाड़ी,बारछी एवं अन्य ग्रामो में रेत के अवैध भंडारण कर रेत माफियाओं का गोरखधंधा जमकर फल फूल रहा है। वही प्रसासन की नाक के नीचे से रेत का अवैध परिवहन जोरो से चलने लगा है।
बरसात होते ही रेत माफियाओं के चेहरों पर अतिउत्साह देखने को मिला। क्योंकि ज्यादा वर्षा होने के कारण नदियों और रपटों में अधिक रेता आती है जिससे कि वो बड़ी मात्रा में अपना अवैध कारोबार सही ढ़ंग से संचालित कर सकते है।
और यही कारण है कि रेत माफियाओं का गिरोह भी बड़ा हुआ और अवैध रेत का कारोबार भी बढ़ गया।
इसी रेत के अवैध कारोबार के बारे में सोशल मीडिया सहित अन्य व्हाट्सएप ग्रुप में चर्चा का विषय बना हुआ है।
जीवनदायनी नदियों पर भी आ सकता संकट
जिस तरह आमला के आस पास की छोटी नदियों से रेत निकाली जा रही है जिससे की अधिकांश नदियों का थोड़ी सी बरसात में उफान पर आ जाना, तटों के कटाव के कारण बाढ़ आना और नदियों में जीव-जंतु कम होने के कारण पानी में ऑक्सीजन की मात्र कम होने से पानी में से बदबू आना, ऐसे ही कई कारण हैं जो मनमाने तरीके से हो रहे अवैध रेत उत्खनन से छोटी-छोटी नदियों के अस्तित्व पर संकट की तरह मंडरा रहे हैं। आज हालात यह है कि कई नदियों में ना तो जल प्रवाह बच रहा है और ना ही रेत।
जानकारी के अनुसार देश की बड़ी नदियों को विशालता देने का कार्य उनकी सहायक छोटी नदियां ही करती हैं। बीते एक-डेढ़ दशक में देश में करीब तीन हजार छोटी नदियां लुप्त हो गईं। इसका असल कारण ऐसी मौसमी छोटी नदियों से बेतहाशा रेत को निकालना है।