क्या इंसानों के खाने योग्य नहीं है यह अनाज? केंद्रीय जांच टीम की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

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शारदा श्रीवास मंडला 

प्रदेश की राजनीति में पीडीएस के तहत बांटे जा रहे चावल को लेकर आरोप-प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं और यह सब हुआ है केंद्रीय जांच टीम के द्वारा लिए गए सैंपल से जो कि दिल्ली स्थित लैब में हुई है, जांच के बाद आई रिपोर्ट में कहा गया है कि मंडला और बालाघाट जिले के वेयरहाउस में रखे गए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के चावल की जांच में पाया गया है कि वह इंसानों के खाने के लायक नहीं है केवल बकरी भेड़ द्वारा खाने लायक हैं ।

कृषि भवन नई दिल्ली के द्वारा जब केंद्र सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई तब केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण के मंत्रालय ने मध्य प्रदेश के सभी सार्वजनिक वितरण केंद्रों से चावल बांटने पर रोक लगा दी जिसका कारण है यहां आयी वह रिपोर्ट जिसके द्वारा जिले के वेयरहाउस से लिए गए अनाज के सैंपल जो दिल्ली के लैब में जांच के बाद बकरी और भेड़ों के खाने लायक पाए गए और यह कहा गया कि यह आनाज इंसानों के खाने लायक बिल्कुल भी नहीं है

30 जुलाई से 2 अगस्त तक हुई थी जांच–

केंद्रीय मंत्रालय के उपायुक्त की टीम ने मंडला और बालाघाट जिले के तथा पीडीएस की दुकानों से 30 जुलाई से 2 अगस्त के बीच 32 नमूने लिए थे इनकी जांच कृषि भवन नई दिल्ली स्थित सेंट्रल लैब में परीक्षण की गई जांच रिपोर्ट के अनुसार सभी नमूनों के चावल खराब निकले, वह जानवरों के खाने लायक पाए गए मानव के नहीं।

कमलनाथ ने की निंदा — केंद्रीय समिति की सौंपी गई रिपोर्ट के बाद प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा इसे अमानवीय कृत्य करार दिया गया है मानवता को तार तार करने वाला है,उन्होंने दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की माँग करी है।

क्या कहते हैं अधिकारी– इस मामले पर जब मंडला नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंधक मनोज श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका कहना है कि जिले में जो अनाज बांटा जाता है वह जिले की ही पैदावार का होता है जिसका सुरक्षित भंडारण स्टेग और वेयरहाउस में किया जाता है और इसे यहीं तैयार कर मिलर्स के माध्यम के माध्यम से बांटा जाता है अनाज की सप्लाई प्रदेश भर में की गई लेकिन कहीं से कोई शिकायत अब तक इसकी गुणवत्ता को लेकर प्राप्त नहीं हुई है, इसकी जांच दिल्ली की लैब में कराई गई है जहां केंद्रीय टीम के द्वारा सरकार से यह कहा गया है कि यह अनाज इंसानों के खाने लायक नहीं जिसके बाद और टीमें गठित की गई हैं और प्रदेशभर मैं अनाजों की सैंपलिंग की जा रही है मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में इस साल 12 लाख क्विंटल धान खरीदी गई थी जिसकी मिलिंग कराई गई और 7 से 8 लाख क्विंटल चावल बनाया गया और गोदामों में जांच दिनांक तक 28 हज़ार क्विंटल चावल का स्टॉक था जो देखने में साफ सुथरा नजर आ रहा था और जिसे दर्जनभर जिलों में भेजा गया समय-समय पर इस अनाज की जांच भी की जाती है जिनमें आज तक शिकायत नहीं आई।

सरकार ने की कार्यवाही–

गुणवत्ताविहीन चावल प्रदाय के लिए गुणवत्ता नियंत्रकों की सेवाएं समाप्त,जिला प्रबंधक निलंबित