पूर्णिमा की श्राद्ध मनाएं मंगलवार को ही-आचार्य कौशलेन्द्र शास्त्री

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ज्योतिष सेवा केन्द्र लखनऊ
आचार्य कौशलेन्द्र पाण्डेय जी
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भाद्रपद पूर्णिमा को अश्विन कृष्ण पक्ष में किए जाने वाले श्राद्ध पार्वण श्राद्ध होते हैं जबकि वार्षिक श्राद्ध एकोदिष्ट होते हैं पार्वण श्राद्ध अपराहन व्यापिनी मृत्यु तिथि में तथा एकोदिष्ट श्राद्ध मध्यान्ह व्यापिनी मृत्यु तिथि में किए जाने चाहिए
यथा-
कन्यागते सवितरि दिनानि पञ्च च । पार्वणे नैव बिधिनां श्राद्धम तत्र विधीयते ।।(मार्कण्डेय)
साथ ही शास्त्रानुसार यदि अपराह्न व्यापिनी तिथि दो दिन असमान रूप से व्याप्त रहे अर्थात एक दिन अधिक और दूसरे दिन कम समय व्याप्त रहे तो वहां अधिक अपराह्न काल व्याप्त होने वाली तिथि में श्राद्ध करना चाहिए
यथा-
अपराह्न-द्वये चामा यदि स्यात् तत्र्याधिका । सा ग्राहिया यदि तुल्या स्यादग्रे वृद्धो परा स्मृता।।
उक्त प्रमाणानुसार इस वर्ष श्राद्ध पक्ष में पार्वण श्राद्ध निकालने का समय दोपहर 1.38 से 4.05 बजे के लगभग इसी निर्णय के आधार पर हम कह पा रहे हैं।
इस वर्ष भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी,पूर्णिमा था अश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि दोपहर 12-27 बजे तक या इससे पूर्व समाप्त हो रही हैं अतः यह तीनों तिथियां पूर्व दिन ही अपराह्न काल में विद्यमान रहेगी अतः पूर्णिमा का 1 को प्रतिपदा का 2 को और द्वितीया का 3 सितंबर को श्राद्ध करना चाहिये
इस वर्ष द्वितीया तिथी दिनांक 3 व 4 सितंबर को दोनों दिन अपराह्न काल में असमान रूप से व्याप्त हो रही हैं किन्तु पूर्व में दिये गये प्रमाणानुसार 3 सितंबर को सम्पूर्ण अपराह्न काल में 4 सितंबर को आंशिक अपराह्न काल मे दोपहर 1.38 से 2.24 बजे तक व्याप्त होने से पूर्व दिन दिनांक 3 सितंबर को द्वितीया का श्राद्ध शास्त्रानुसार मान्य रहेगा।