विवाह पत्रिकाओं में वर-वधू की जन्मतिथि लिखना अनिवार्य -बाल विवाह रोकथाम हेतु जागरूकता अभियान

Scn news india

हर्षिता वंत्रप 

बैतूल,
जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास ने बताया कि विभाग द्वारा बाल विवाह रोकथाम के सफल क्रियान्वयन के लिए लाडो अभियान अंतर्गत देव उठनी ग्यारस 08 नवंबर के पूर्व जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत बाल विवाह रोकथाम के पम्पलेट्स वितरित किए जा रहे हैं तथा बाल विवाह रोको अभियान के होर्डिंग्स मुख्य स्थानों पर लगाए जा रहे हैं। दीवार लेखन के साथ-साथ बाल विवाह रोकथाम के स्टीकर यात्री वाहनों एवं किराना दुकानों में चिपकाए जा रहे है।
बाल विवाह एवं बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधान
18 वर्ष से कम उम्र की लडक़ी एवं 21 वर्ष से कम उम्र के लडक़े का विवाह बाल विवाह कहलाता है। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के अनुच्छेद 11 में ऐसे लोगों के लिए सजा का प्रावधान किया गया है जो बाल विवाह को मंजूरी/मान्यता और प्रोत्साहन देते हैं। यदि किसी व्यक्ति को पता चलता है कि किसी स्थान पर बाल विवाह हो रहा है या बाल विवाह सम्पन्न होने जा रहा है, तो उसे न होने दें, तो उसके बारे में संबंधित अधिकारियों को सूचित करें। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो मौजूदा कानून में उसे भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
इस अपराध को बढ़ावा देने के एवज में भारतीय दण्ड संहिता के तहत उस पर मुकदमा चलाया जा सकता है। बाल विवाह सम्पन्न कराने में सहयोग देने वाले बारातियों, टेन्ट वाले, बाजे वाले, घोड़े वाले, कैटर्स, पंडित, मौलवी, पादरी, ग्रंथी, ज्योतिषी को भी सजा का प्रावधान है।
बाल विवाह कराने में सहयोग करने वालों को अधिनियम के तहत दो वर्ष की सजा या एक लाख रूपए के अर्थदण्ड से दण्डित किया जा सकता है।
आगामी दिवसों में जिनके विवाह सम्पन्न होने जा रहे हैं, उन्हें विवाह पत्रिकाओं में उनकी जन्मतिथि लिखना अनिवार्य किया गया है। विवाह पत्रिका छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस की यह जिम्मेदारी होगी कि वे पत्रिका छापते समय वर-वधू की जन्मतिथि लिखें।

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