विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी दिवस पर ली शपथ ,पूरा करेंगे पुरखों के अधूरे काम

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प्रवीण मलैया ब्यूरों 

घोड़ाडोंगरी। समाधी स्थल पर 1930 के सत्याग्रह के शहीदों और उसके नेता गंजन सिंग को भी याद किया गया. इस कार्यक्रम में बंजारीढाल, खापा, छिमडी, कुसमेरी, सिलपटी, शाहपुर आदि गाँव के आदिवासीयो ने भाग लिया.
विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर लगभग आधा दर्जन के गाँव के आदिवासियों ने 1930 के सत्याग्रह स्थल बंजारीढाल में समाधी स्थल पर इक्कठा होकर आज़ादी आन्दोलन में शहीद हुए अपने पुरखो को याद किया और जंगल फिर से हराभरा करने की शपथ ली. राजेन्द्र गढ़वाल ने बताया कि श्रमिक आदिवासी संगठन एवं समाजवादी जन परिषद के बैनर तले हुए इस कार्यक्रम में समाधी स्थल की मिट्टी हाथ में लेकर यह शपथ ली कि वो अपने पुरखो के अधूरे काम को पूरा करेंगे. वो जंगल को फिर से पहला जैसा करेंगे और उस पर अपना हक़ नहीं छोड़ेंगे. इस अवसर उन्होंने आम, जाम, जामुन के 50 पौधों का भी वितरण किया.
ज्ञात हो कि जब आजादी के आन्दोलन में1930 में गांधीजी ने लोगो की जरुरत पर कर लगाने वाले अंग्रेजो के कानून के खिलाफ नमक सत्याग्रह कर दांडी यात्रा की थी तब बैतूल जिले के आदिवासीयो ने उसे अंग्रेजो के जंगल में चराई और लकड़ी लाने पर रोक और टैक्स लगाने की नीति के खिलाफ आन्दोलन किया था. बंजारीढाल में इसके लिए हजारो की संख्या में आदिवासी इक्कठा हुए थे इस आन्दोलन में अंग्रेजो की गोली से एक आदिवासी मारा गया था और कई घायल हुए थे.
विश्व आदिवासी दिवस उसी स्थल पर मनाया गया.