अनूपपुर विधानसभा उपचुनाव – कांग्रेस संगठन में मचा है घमासान अपने अपने हिसाब से दे रहे मीडिया में बयान!

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चंद्रमणि विश्वकर्मा 

अनूपपुर (एमपी) मध्यप्रदेश कांग्रेस की राजनीति ऐसे नेताओं के इर्दगिर्द घूमती दिखाई पड़ रही है जो व्यक्तिवादी राजनीति में विश्वास करते हैं पार्टी उनके लिए कोई मायने नहीं रखती। इस धारणा को तोड़ने के लिए कमल नाथ को कमान सौंपी गई पर वे भी प्रदेश कांग्रेस को व्यक्तिवादी चरित्र से अलग नहीं कर पाये। खामियाजा सामने है।
कांग्रेस सरकार से बाइस विधायक जो अब चौबीस की संख्या में हो गये हैं बल्कि 36 हो जायें कहा नहीं जा सकता। इस तरह बिक कर विधायकों का जाना यह संदेश देता है कि नेताओं में पार्टी संगठन का जरा सा भी भय नहीं है। ऐसे दलबदलू व्यक्तिवादी नेताओं को मालुम है कि कांग्रेस के पास वोटर हैं पर बीजेपी जैसा मजबूत संगठन नहीं। इसलिए आम की तरह चूस लो, जब रस खत्म हो जाये गुठली फ़ेंक दो। दूसरा आम ले लो। कारण है वे (कांग्रेस नेता) अपने अपने क्षेत्र में अपने निजी गिरोह बना कर काम कर रहे हैं। पार्टी व उसका चुनाव चिन्ह चुनाव में मतदाताओं से केवल वोट के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
पूरे देश में कांग्रेस की यही स्थिति है। हाईकमान के पास नेता पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को लेकर उन पर नियन्त्रण के लिए कोई रणनीति नहीं है। किसी क्षेत्र का एक नेता पार्टी छोड़ चला गया तो उस क्षेत्र में जिला और ब्लाक पदाधिकारी भी बेलगाम हो जाते हैं। परिणाम निष्ठावान कार्यकर्ता और वोटर हताश हो जाते हैं।
उदाहरण के तौर पर मध्यप्रदेश में ही देखें जहाँ अपने व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के चलते चलती सरकार को गिरा दिया गया। 22 विधायक को लेकर बीजेपी से हाथ मिला सरकार बनवा दी।

इसी कड़ी में हम बात करते हैं एक ऐसे ही विधान सभा क्षेत्र की जहाँ का नेतृत्व कांग्रेस विधायक बिसाहू लाल सिंह कर रहे थे। वे अपने किशोरावस्था से ही कांग्रेस पार्टी से जुड़े थे। कई बार विधायक रहे मालदार विभाग के मन्त्री भी रहे। यानी पूरी जिंदगी कांग्रेस में बिताई। छ: महीने पहले तक वे कांग्रेस में ही निष्ठा जताते रहे थे। पर उनके दिल में एक बार पुन: मन्त्री बनने की व्यक्तिगत लालसा, महत्वाकांक्षा हावी थी। वे मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी भी प्रकट करते रहे थे। जिसका फायदा बीजेपी ने बखूबी उठाया और उनकी दुखती रग पर हाथ रख दिया। सौदा मंत्री पद पर आकर खत्म हुआ। मीडिया में करोड़ों के लेन देन कर खरीद फरोख्त की चर्चा खूब सुर्खियां बटोरी। शिवराज सिंह तो यह भी कहते दिखे कि सब हाई कमान के निर्देश पर हुआ। मतलब मोदी शाह के इशारे पर।
करोना की मार छेल रहे अनूपपुर मतदाताओं की फिक्र न करते हुए बिसाहू लाल सिंह बड़ी बेशर्मी, व निकम्मापन दिखाते हुए 50 सालों का कांग्रेस का मुखौटा एक झटके में उतार फेंका। तिरंगा का दुपट्टा भी उतार फेंका और दुरंगा दुपट्टा गले में लटका लिया। लेकिन वह स्वतंत्रता दुरंगा दुपट्टे में नहीं मिलेगी जो तिरंगे में थी। पर कांग्रेस में ऐसे मौका परस्तों की कमी नहीं।

आईए अब हम अपनों से चोंट खाई कांग्रेस पार्टी के अंदर की स्थिति की चर्चा करते हैं जिसका रास्ता बूथ की ओर जाता है मतलब जिला और ब्लाक संगठन पर गौर करें।
देखा जाये तो पूरे देश में ही निचली सतह पर वही स्थिति है जो ऊपरी सतह पर है।
उदाहरण के तौर पर इसी अनूपपुर विधानसभा को पकड़ते हैं जहाँ उपचुनाव होना है।
जिलापंचात अध्यक्ष सहित जनपद सदस्य अपनी अपनी दावेदारी में व्यस्त हैं। इनके अलावा कई गुट के लोग भी “मेरा नेता कैसा हो फलाने के जैसा हो” का नारा बुलंद किए हुए हैं।
बदरा ब्लाक अध्यक्ष तो खुल कर बगावत का बिगुल फूँक दिया है। आड़ लिया है संगठन के लोगों को ही टिकट देने की। बल्कि यह भी कहते हैं कि ब्लाक के अंदर मंडलम अध्यक्ष भी मेरा आदमी है सभी पदाधिकारी भी मेरे हैं। जो कहूंगा वह लोग करेंगे। “बिसाहू लाल ही ठीक” मतलब “पद” कांग्रेस पार्टी का, “राग” बिसाहू लाल का गजब हो गया भाई।

गौरतलब है बदरा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ है बिसाहू लाल सिंह कांग्रेस में थे तो जाहिर है वोट उन्हें मिलते रहे इसलिए बिसाहू लाल की “नमक हलाली” अभी भी देखी जा रही हैं। ऐसे लोग पार्टी को नेस्तनाबूत करने काफी हैं। जो सीधे सीधे यह कहे कि हमारे मन का न हुआ तो फिर “बिसाहू लाल ही हमारे नेता” मतलब सीधे सीधे पार्टी और हाई कमान को चैलेंज किया जा रहा है। आखिर किसके इसारे पर यह निकम्मापन, निर्लज्जता, बेशर्मी दिखाई जा रही है। इससे समझा जा सकता है कि ऐसे बेकाबू छुटभैये चाटुकारिता कर पद में काबिज लोग न्यूज पोर्टल और अखबारों के जरिये पार्टी विरोधी गतिविधियों को सरेआम अंजाम दे रहे हैं। ऐसे लोगों पर लगाम लगाने वाला और न ही संगठन को सम्हालने वाला कोई माई-बाप जिले में है। जो भी बैठे हैं वो भी लगता है पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। तब क्या कांग्रेस के लिए दलबदलू नेताओं का मुकाबला करना अपने इन बड़बोले ब्लाक, जिला अध्यक्षों के मत्थे सम्भव हो सकेगा।