रक्षाबंधन पर्व पर भाइयों की कलाई पर सजी राखियां

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चंद्रमणि विश्वकर्मा 

राखी का धागा हमारे भीतर आत्मविश्वास भरने के साथ-साथ रक्षा के संकल्पों को याद भी दिलाता रहता है.. हमारी पर्व-संस्कृति में रक्षा-बंधन के पर्व पर बहन द्वारा भाई को राखी बांधने की परंपरा है।

भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व सावन पूर्णिमा यानि सोमवार को धूमधाम से मनाया गया। सावन पूर्णिमा, सोमवार व रक्षाबंधन का यह अद्भुत संयोग है। आचार्य कौशलेंद्र पांडेय जी तीन अगस्त को सुबह 8.29 बजे तक भद्रा रहेगा। ऐसे में रक्षा बंधन का मुहुर्त सुबह 8.30 बजे से रात्रि 8.21 बजे तक रहेगा। इस अवधि में ही बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर मिठाई खिलाई और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प भी लिया। भाइयों नेे भी अपनी बहन को उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। इस दौरान सोमवार को त्‍योहार की वजह से बाजार भी गुलजार रहे।

सावन का अंतिम सोमवार होने से रुद्राभिषेक-पूजन आदि के विधान अनुष्ठान भी पूरे किए गए। इसी दिन वैदिक ब्राह्मण श्रावणी उपाकर्म के विधान भी पूरे कर रहे हैं। हालांकि कोरोना संकट के कारण सभी अनुष्ठान घर में ही करने पड़े। दूसरी ओर रक्षा बंधन को लेकर एक दिन पूर्व रविवार से लेकर साेेेमवार की शाम तक को मिठाई व राखियां खरीदने के लिए प्रमुख बाजार व दुकानों पर काफी भीड़ रही।