ई रक्षाबंधन पर्व शिविर में जैन कवि सम्मेलन में हुआ सुंदर काव्य पाठ, मैं वो हूँ जो निज बाहुबल से तोड़ सकता हूँ पहाड़ को – गणतंत्र ओजस्वी

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स्वप्निल जैन ब्यूरों
खनियांधाना ।
खनियांधाना नगर के श्री महावीर कुंदकुंद कहान नन्दीश्वर विद्यापीठ एवं सर्वोदय अहिंसा ट्रस्ट के सँयुक्त तत्वावधान में चल रहे तीन दिवसीय ई रक्षाबंधन पर्व शिविर के दूसरे दिवस राष्ट्रीय जैन कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें समाज के युवा कवियों एवं कवित्रियों ने सुंदर काव्य पाठ कर सभी का मन मोह लिया।

इस अवसर पर सर्वोदय अहिंसा ट्रस्ट के प्रदेश संयोजक दीपकराज जैन एवं मीडिया प्रभारी सचिन मोदी ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल मे जैन समाज द्वारा ऑनलाइन धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन कर राज आज्ञा को मानते हुए जनजागरण का कार्य किया जा रहा है। जिससे समाज बन्धु सोशलडिस्टेंडिंग का पालन करते हुए धर्माराधना के साथ जिन शासन की मंगल प्रभावना कर रहें हैं।

कवि सम्मेलन का शुभारंभ नीतिशा सिद्धार्थ जैन अमेरिका के मंगलमय मंगलाचरण से हुआ। आयोजन का सफल संचालन पं.गणतंत्र ओजस्वी आगरा के साथ सयोंजन पं.संजय शास्त्री जयपुर एवं पं.दीपक शास्त्री ध्रुव खनियांधाना ने किया।

ऑनलाइन जैन कवि सम्मेलन में देश की जानी मानी कवयित्री सुश्री नम्रता जैन छतरपुर ने भगवान महावीर के चरणों में नमन करते हुये काव्य पाठ किया उन्होंने कहा कि – कैसे गाथा गाएं हम त्रिशला के वीर की,आओ आज मिलके बोलें जय हो महावीर की रचना पढ़ी और श्रोताओं की शुभकामनाएं प्राप्त की।

रक्षाबन्धन पर्व पर रसात्मक भावों को पिरोते हुये जैन कवि संगम के अध्यक्ष और अन्तर्राष्ट्रीय कवि नरेन्द्रपाल जैन ऋषभदेव केसरियाजी ने काव्य पाठ करते हुये कहा कि कर्म का बंधन बहुत बलि है,ज्ञानीजन को मोह लिया।
करमों के बंधन को काटे जो हमारे सभी,त्याग रूपी असि में वो धार होनी चाहिए सुंदर रचनापाठ किया।

जबलपुर के युवा कवि अमित जैन मौलिक ने पर्व के महत्व को प्रदर्शित करती हुयी अपनी रचना सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी उन्होंने कहा कि हो गये हैं वर्ष अगणित,पर है प्रासंगिक विषय रक्षाबंधन क्यों मनाते,क्यों मनाना चाहिये? यह कराने स्मरण,दायित्व का कर्तव्य का आयेगा आता रहा है,और आना चाहिए।

युवा कवि एवं संचालक गणतंत्र ओजस्वी ने कवि सम्मेलन के संचालन के साथ-साथ रक्षाबन्धन पर्व की घटना को वीर रस में बांधते हुये श्रुतसागर मुनिराज और चारों मंत्रियों के प्रसंग को इन पंक्तियों से प्रस्तुत किया –
“मैं वो हूं जो निज बाहुबल से तोड़ सकता पहाड़ को,मैं वो हूं जो अवरुद्ध करता,शेर की दहाड़ को।नाचीज ना पाषाण पथ का,शाख का पत्ता नहीं,आंधी हो तूफान चाहे,टूट कर गिरता नहीं!!”
कवि सम्मेलन में देश के सिद्धहस्त मंचीय गीतकार राकेश जैन राकेन्दु ने भी अपने मनमोहक अन्दाज में अपनी रचना
“अपना ये रक्षा बन्धन है,सचमुच ये सच्चा बन्धन है। तन मन को जो पावन कर दे,उन रिश्तों का अभिनन्दन है।जो ओढ़ गये उपसर्गों को, और तोड़ गये जगबन्धन हैं। कर गये सुरक्षित आगम को, उन श्री चरणों में वन्दन है!! सुंदर काव्य रचना सुनायी।

युवा कवयित्री सोनल जैन सूरत ने कहा कि “अब ना किसी भी मौत की जंजीर चाहिए। और ना ही इस जहान की जागीर चाहिए,
वह जो अलख जगा गए थे धर्म की कभी,हां इस धरा पर फिर वही महावीर चाहिए!!””
सुनाकर भगवान महावीर की उपयोगिता का चित्रण किया।
कवि सम्मेलन में देश-विदेश के जाने माने सबरसी रचनाकार डॉ. कमलेश जैन बसन्त ने कहा कि विषम घड़ी है कठिनाई वाली, लेकिन हमें संभलकर चलना होगा। अगर प्राण प्यारे हैं तुमको, कदम फूंक कर चलना होगा,पर्वाधारित सबरसी रचना सुनाकर श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।

इस अवसर पर अभिषेक जैन बालाघाट,प्रमोद जैन एवं सचिन मोदी खनियाधाना के साथ कवि सम्मेलन के संयोजक द्वय दीपक जैन ध्रुव एवं संजय शास्त्री जयपुर ने भी काव्य पाठ किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्रीमती अनुपमा राकेश जैन दुबई,विशिष्ट अतिथि राजीव जैन कोठादार यूएसए एवं अध्यक्षता एस.पी.जैन भोपाल ने की।