सोयाबीन की फसलों में पीला मोजिक ,किसानों के लिए चिंता का विषय

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प्रवीण गौर ब्यूरों 

विधानसभा सिवनीमालवा के तहसील डोलरिया के अंतर्गत आने वाले कई ग्रामों में शैल बेराखेड़ी दहेड़ी किसानों की सोयाबीन की फसलों में पीला मोजिक
जैसी बीमारी का प्रकोप फैल रही है यह हम किसानों के लिए बहुत चिंता का विषय है
किसान हो रहे ।
परेशान वही ग्राम के किसानों का कहना है। कि हम किसानों को फसलों में कई प्रकार की बीमारियों का सामना करना। पड़ता है। हमारे ग्राम के ग्राम सेवक से कोई जानकारी मिल पाती है।


ना ही वह समय पर गांव आकर गांव में आकर हम किसानों को किसी प्रकार की जानकारी से अवगत कराते हैं
ना तो हमारे कृषि क्षेत्र के कोई अधिकारी आते हैं।
ना ही हमें किसी भी फसलों की बीमारी की जानकारी से अवगत कराते
है। हम लोगों को कृषि कार्य की कोई योजनायो का लाभ भी नही मिला। ना तो किसी प्रकार की जानकारी प्राप्त होती है।
कृषि विभाग के अधिकारी एवं कृषि मंत्री से मैं निवेदन करना चाहता हूं कि हम किसानों की बहुत दयनीय स्थिति है ।
ना तो हमें मूंग का भाव मिल पाता है।
नाही हमें किसी प्रकार की राहत राशि पिछले वर्ष से अधिक बारिश हुई ।तो हमें ना तो सोयाबीन की राहत राशि मिली ना ही गेहूं में हमें इसी प्रकार का लाभ मिल पाता है।

मौसम के खुलते ही सोयाबीन, में पीला मोजेेक रोग की अधिक सम्भावना बड़ रहीहै।
बीते एक सप्ताह बारिश थमी रहने के दौरान इसका असर भी दिखाई दिया है। लेकिन यह खतरा टला नहीं है। अच्छी बारिश के दौर में भी फसलों को बचाए रखने के लिए किसानों को अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत है।जिले में इस समय खरीफ फसलों में सोयाबीन, मूंग, उड़द, मक्का व धान की फसल लगी हुई है। जिसमें सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल, हरी अद्र्धकुण्डलक इल्ली का आरम्भिक प्रकोप देखा जा रहा है। जिससे फसल को बचाने के लिए किसानो को एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि पीले पड़ रहे पौधों को शुरूआत में ही उखाड़ कर फैंक दें, ताकि बाकी फसल को यलो मोजेक बीमारी से बचाया जा सके।

पीला मोजेक रोग सोयाबीन की फसल में विशेष तौर पर लगता है। यह रोग एक विषाणु जनित रोग है। जिसके प्रभाव से पौधे की पत्तियां पीली पड़कर गल जाती हैं, या सूख जाती हैं। जिससे उत्पादन पर खासा असर पड़ता है।इसी तरह सफेद मक्खी (बेमेसिया टेबेकाई) से स्वस्थ पौधों को नुकसान पहुंचता है।