गांव की बेटियों का कमाल…. दोहरी परीक्षा में सफल होकर बढ़ाया मायके और ससुराल का सम्मान,प्रदेश की सूची में संयुक्त रूप से हासिल किया तीसरा स्थान

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स्वप्निल जैन ब्यूरों
खनियांधाना।
कहते हैं न दीपक है अगर बेटा तो बाती हैं बेटीयाँ…दो-दो कुलों की लाज निभाती हैं बेटियां। इस कहावत को शत प्रतिशत सही साबित किया है।

पिछोर के शासकीय कन्या उमावि की कक्षा 12 की छात्रा कीर्ती साहू पुत्री धनीराम साहू और सोनम पुत्री संतोष लोधी ने। दोनों ही छात्राओं ने गृह विज्ञान संकाय में प्रदेश की सूची में 439/500 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से तीसरा स्थान हासिल किया है। कीर्ती जहां स्कूल जाने से पहले अपने घर के काम काज में मां का हाथ बटाती थी तो सोनम मां के साथ पिता के खेत में भी दो दो हाथ करती थी, लेकिन इसके बाबजूद रेगुलर स्कूल जाना व समय निकाल कर घर पर पढ़ने का सिलसिला जारी रखा। एग्जाम शुरू हुए उससे पहले ही माता-पिता ने यह तय कर दिया कि अब स्कूल की परीक्षा के बाद उन्हें ससुराल की जिम्मेदारी निभानी है।
कीर्ती के अनुसार इससे मानसिक दबाब बढ़ गया लेकिन फिर भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का विचार कायम रखा। परीक्षा के दौरान तीन पेपर होने के बाद ही कोरोना संक्रमण फैल गया, इसी दौरान कीर्ती और सोनम की शादी भी मई महीने में कर दी गई। अभी दोनों लाड़ो ससुराल को ठीक से समझ ही नहीं पाई थीं, उससे पहले ही फिर से एग्जाम की डेट आ गई, लेकिन ससुराल की जिम्मेदारियों ने मायके लौट कर परीक्षा की तैयारी करने का मौका नहीं दिया, आखिरी समय में थोड़ी बहुत तैयारी करके परीक्षा दी और एक बार फिर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने लग गईं क्योंकि अब उनका भाग्य लिखा जा चुका था। सोमवार को जब परीक्षा परिणाम आया तो सबके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि दोनों बेटियों ने वो कर दिखाया था जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। दोनों बेटियां प्रदेश की सूची में उन सितारों की तरह दमक रहीं थीं, जिनके पास खुद की कोई रोशनी नहीं होती।

कीर्ती के अनुसार उन्हें अगर आखिरी के दो पेपरों में तैयारी के लिए समय मिल गया होता तो शायद यह परीक्षा परिणाम शायद और कुछ होता। गांव की इन बेटियों ने आज खुद को साबित कर दोहरी परीक्षा पास की है। स्कूली शिक्षा के साथ साथ वैवाहिक एवं पारिवारिक जिम्मेदारियों को बाखूबी निभाया तथा मायके का मान तो ससुराल का सम्मान भी बढ़ाया आज पूरे क्षेत्र में दोनों बेटियों की धमक ने लोगों को यह कहने पर मजबूर कर दिया है, बेटियां हों तो ऐसी।