न्यायाधीश पिता-पुत्र की मौत के मामले में नया खुलासा,पुलिस ने आटा जब्त कर घर सील किया

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मनोहर

बैतूल – न्यायाधीश एडीजे महेन्द्र कुमार त्रिपाठी और पुत्र की  मौत मामले में नया पहलू सामने आया है।  जिसमे इंदौर से लाये गए आंटे की बोरी संदिग्ध है। जिसे पुलिस  कब्जे में ले कर  जांच में जुटी है। एडीजे महेन्द्र कुमार त्रिपाठी और पुत्र की  अचानक मौत इस तरह होना किसी के गले नहीं उतर रहा है लेकिन सच यही है कि दोनों की दुखद मौत हो चुकी है।

सूत्रों से मिली जानकारी पर यकीन करें तो बैतूल जिला न्यायालय में पदस्थ एडीजे महेन्द्र कुमार त्रिपाठी कालापाठा स्थित निवास में अपनी पत्नी और दो बेटों के साथ रहते थे। 21   जुलाई की रात को इन्होंने भोजन किया। घर में कुल 6 चपाती बनी थी। पिता और दोनों बेटों ने 2-2 खाई जबकि पत्नी ने सिर्फ चावल खाया। भोजन के बाद बाप-बेटों की हालत बिगड़ी। 22 को दिन भर उल्टी-दस्त चलते रहे। चूंकि उनकी पत्नी ईस्टर्न कोल फिल्ड लिमिटेड में नर्स है ..इसलिए नार्मल इलाज घर पर चलता रहा । वहीँ 23 जुलाई की दोपहर को सूचना पर जिला अस्पताल में पदस्थ डा एके पांडे और डा आनंद मालवीय उन्हें देखने पहुंचे। देखने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती करने की बात कही लेकिन न्यायाधीश श्री त्रिपाठी ने एंबुलेंस बुलाकर पाढर अस्पताल जाने को कहा।

पाढर अस्पताल के रिकार्ड के अनुसार पिता और बड़ा बेटा 23 जुलाई को भर्ती हुए। जबकि छोटे बेटे की हालत ठीक हो गई थी।

इलाज के उपरांत दोनों की हालत में कुछ सुधार भी आया। कल 25 जुलाई की सुबह भी जो लोग उनसे मिले तो उनकी दोनों से अच्छे से बात हुई थी और जल्द ही अस्पताल से छुट्टी की बात भी की। लेकिन कल शनिवार की शाम दोनों की हालत बिगड़ी और दोनों को पाढर से नागपुर एलेक्स अस्पताल के लिए भेजा गया।

बताया यही जा रहा कि रास्ते में ही 25 वर्षीय बड़े बेटे ने दम तोड़ दिया था जबकि देर रात न्यायाधीश पिता ने भी दम तोड़ दिया। सूचना यह भी है कि गंज पुलिस ने न्यायाधीश के बयान ले लिए थे जिसमें उन्होंने आटे की जांच की बात कही थी। पुलिस ने भी आटा जब्त कर घर सील कर दिया है।

बताया यह भी गया कि आटा शायद इंदौर से आया था और एक सूत्र के अनुसार आटे में किसी के व्दारा कुछ मिलाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि न्यायाधीश श्री त्रिपाठी तो डायबिटीज और बीपी के मरीज थे लेकिन उनका बड़ा पुत्र किसी बाडी बिल्डर से कम नहीं था..ऐसे में सिर्फ फुड प्वाजनिंग से उसकी मौत किसी के गले नहीं उतर रही। एक तथ्य यह भी है कि मौत से पहले दोनों करीब ढाई दिन पाढर अस्पताल में उपचाररत रहे। इतने लंबे समय में फुड प्वाजनिंग सरीखी बीमारी आमतौर पर कंट्रोल में आ जाती है। लेकिन इलाज के बाद भी स्थिति बिगड़ी और पाढर अस्पताल से जाने के कुछ घंटों के अंदर ही बाप-बेटे की मौत हो गई।

उधर दोनों शव का पोस्टमार्टम नागपुर में हो रहा है उसके बाद उनके पैतृक घर कटनी में अंतिम संस्कार करने की खबर है। न्यायाधीश के परिजन नागपुर पहुंच चुके हैं।

मामला एक वरिष्ठ जज का होने से पुलिस भी पूर्ण सावधानी बरत कर जांच कर रही है। पूरे मध्यप्रदेश के न्यायालयीन क्षेत्रों में इस घटना से सनसनी मच गई है।