जनपद पंचायत की नवनिर्मित व्यवसायिक 23 दुकानों के आवंटन पर मंडरा रहे निरस्ती के बादल

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दिलीप पाल ब्यूरों 

नवनिर्मित 23 व्यवसायिक दुकानों के आवंटन प्रक्रिया सहित जनप्रतिनिधि का काउन्टडाउन, हो सकती है एफआईआर

आमला . जनपद पंचायत की 23 दुकानों को लेकर नगर सहित ग्रामीण के जनप्रतिनिधियों द्वारा दुकानों के आवंटन प्रक्रिया मे हुए भ्रष्टाचार को लेकर कुछ महीने पूर्व कलेक्टर को जांच करने ज्ञापन सौपा गया था|पूरे नगर मे इस मामले को लेकर राजनीतिक हलचल भी तेज दिखाई दी जबकि आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला भी चलता रहा| जबकि इस मामले को लेकर पूर्व मे भी बेरोजगार संगठन के युवाओ ने आंदोलन किए थे|जिसके बाद कलेक्टर शशांक मिश्र ने आवंटन पर रोक लगा दी थी|लेकिन जैसे तैसे जांच कर खनापूर्ति की और पुनः आवंटन प्रक्रिया को कराया गया था|जिसका भी विरोध युवाओ द्वारा किया गया लेकिन सभी युवाओ पर शांति भंग का मामला दर्ज कर उन्हे डराया गया और मामले को दबाने की कोशिश की गई थी| जिससे युवाओ मे भी डर व्याप्त होता गया और आंदोलन से उन्हे पीछे हटना पड़ा ।वही पूरा मामला मानो इस तरह शांत हुआ हो की कुछ हुआ ही न हो और गुपचुप तरीके से पुनः  आवंटन कर दिया गया। अंततः वर्तमान मे  वही मुद्दों को लेकर पुनः जांच की गई,जिसमे वर्तमान कलेक्टर द्वारा मुलताई एसडीएम को जांच कर दस दिनों मे प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए। वही अधिकारी द्वारा भी मौके पर भौतिक निरीक्षण कर संबंधित दुकानदारों के कथन और उनके दस्तावेज़ भी बुलाए गए थे|मिली जानकारी अनुसार इस सब प्रक्रिया को पूर्ण करने के बाद अधिकारी ने भी इस मामले मे दुकानदारों द्वारा निविदा की शर्तों का पालन नहीं किया जाना पाया गया।

नगर के निवासी भी निविदा मे हुए शामिल,फर्जी दस्तावेज़ पर एफआईआर

दुकानों के निविदा आवंटन शर्तों मे निवास शर्त मे उल्लेख किया गया है की जो भी तीन वर्षों से अधिक ग्रामीण इलाके मे रह रहा है वही ग्रामीण निवासी कहलएगा।जिसकी पूर्ति करने कुछ दुकानदारों ने निविदा के समय ही नगर से नाम कटवा कर ग्रामीण क्षेत्र मे जोड़ लिए गए|जिससे की वह निविदा मे शामिल हो जाए।जिसमे की सरपंच द्वारा भी गलत तरीके से निवास की जानकारी दी गई है जिसको लेकर भी जांच कराई गई है और लगभग 5 दुकानों मे इस तरह की धांधली उजागर होने की संभावना है|वही एक सोसायटी के सेल्समेन भी इस आवंटन प्रक्रिया की गंगा मे हाथ धोते नजर आए है |

जनप्रतिनिधि द्वारा पद का लाभ के लिए उपयोग धारा 40 का उलंघन

इन दुकानों मे एक दुकानदार जो की जनपद मे वर्तमान मे पद पर आसीन रहकर अपनी पत्नी के नाम दुकान आवंटित करवा कर किसी और के द्वारा दुकान संचालित करना पाया गया|जबकि नीलामी के पर्यवेक्षण के लिए जनपद स्तरीय समिति का गठन हुआ जिसमे यह खुद बतौर सदस्य शामिल हुए । आवंटन प्रक्रिया मे अपनों को लाभ देने के लिए यह षड्यन्त्र रचा जिसमे अपने चहेतो को सदस्य आसानी से दुकान आवंटित कर सके|जबकि कानून के अनुसार कोई भी जनप्रतिनिधि जो मानदेय या सरकार द्वारा लाभ या सुविधा लेता हो वह पद पर रहकर खुद को या अपने परिजन को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फायदा देता है तो यह धारा 40 का उलंघन माना जाता है|जिसके तहत भी इस जनप्रतिनिधि पर मामला बनने की संभावना बनी हुई है।

इस मामले को लेकर नगर मे चर्चा का विषय बना हुआ है की एसडीएम ने जांच कर कलेक्टर के पास प्रतिवेदन पहुचने के बाद भी कार्यवाही नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है । जिस तरह दो वर्ष पूर्व   मामले को दबा दिया गया था क्या उसी तरह से इस बार भी कुछ होने की संभावना को लोगों द्वारा नकारा नहीं जा रहा है। जबकि नगर मे चर्चा जनपद पंचायत आमला के मुख्य अधिकारी बावरिया की एक ईमानदार अधिकारी के रूप मे पूरे नगर मे प्रशंसा हो रही है । जिस तरह से उन्होंने भी इस मामले को  उच्च अधिकारी के समक्ष पारदर्शिता के साथ प्रस्तुत किया|

इनका कहना है…..

दुकानों के संबंध मे कलेक्टर द्वारा निरस्ती के आदेश मुझे प्राप्त हो चुके है पूरी प्रक्रिया कर दुकानों के निरस्ती की कार्यवाही की जाएगी और दुकानों को पुनः आवंटन किया जाएगा

संस्कार बावरिया सीईओ जनपद आमला