नागपंचमी एवं कालसर्प दोष-आचार्य कौशलेन्द्र पाण्डेय

Scn news india

आचार्य कौशलेन्द्र पाण्डेय जी

आचार्य कौशलेंद्र पांडेय के अनुसार, नाग भगवान शंकर के अंग भूषण माने गए हैं। नागपंचमी के दिन शिवजी के साथ ही नागों की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। नाग-पंचमी श्रावण मास में शुक्लपक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। हिंदू धर्मग्रंथों में नाग को प्रत्येक पंचमी_तिथि का देवता माना गया है, परंतु नाग-पंचमी पर नाग की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है। नाग-पंचमी का पर्व धार्मिक आस्था व विश्वास के सहारे हमारी बेहतरी की कामना का प्रतीक है। यह जीव-जंतुओं के प्रति समभाव, हिंसक प्राणियों के प्रति भी दयाभाव व अहिंसा के अभयदान की प्रेरणा देता है। यह पर्व हमें पर्यावरण से भी जोड़ता है।
पुराण व्याख्या अनुसार
इस व्रत के प्रताप से कालभय, विषजन्य मृत्यु व सर्पभय नहीं रहता है। नागपंचमी के व्रत का सीधा संबंध उस नागपूजा से भी है, जो शेषनाग भगवान शंकर व भगवान विष्णु की सेवा में भी तत्पर हैं। इनकी पूजा से शिव व विष्णु पूजा के तुल्य फल मिलता है।
पुराणों के अनुसार, सूर्य के रथ में बारह सर्प (नाग) हैं, जो क्रमश: प्रत्येक माह में उनके रथ के वाहक बनते हैं। भगवान विष्णु क्षीर-सागर में शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं। शेषनाग ही रामावतार में लक्ष्मण व कृष्णावतार में बलराम के रूप में अवतरित हुए थे।
मान्यता है कि नाग-पंचमी के दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कालिय-मर्दन लीला हुई थी।
मान्यता है कि ब्रह्माजी द्वारा पंचमी के दिन वरदान दिए जाने व पंचमी के दिन ही आस्तीक मुनि द्वारा नागों की रक्षा किए जाने के कारण पंचमी-तिथि नागों को समर्पित है

नाग-पंचमी पर मुख्यत: पांच पौराणिक नागों की पूजा होती है-अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक व पिंगल।
नाग के कई नाम हैं जैसे शेष यानी अनंत, बासुकि, शंख, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर, घृतराष्ट, ऊ शंखपाल, कालिया, तक्षक व पिंगल इन बारह नागों की बारह महीनों में पूजा करने का विधान है।
जो भी नाग पंचमी को व्रत रखता है, उसे शुभ फल मिलता है। इस दिन नागों को दूध पिलाने से सभी बड़े-बड़े नाग अभय दान देते हैं। परिवार में सर्पभय नहीं रहता। कालसर्पयोग का प्रभाव क्षीण हो जाता है। इस दिन कालसर्पदोष की निवृति के लिए पूजा करना भी फलदायक होता है।
कदापि, भूलकर भी ना करें यह…
अंधविश्वास के चलते लोग नाग-पंचमी के दिन सांपों को दूध पिलाते हैं। यह गलत है। सांप स्वभावत: दूध नहीं पीते। सांपों को दूध पिलाने के प्रलोभन में सपेरे कई दिन पहले उनका भोजन-पानी बंद कर देते हैं। अत: भूख-प्यास शांत करने के लिए सांप नाग-पंचमी को दिया जाने वाला दूध ग्रहण तो कर लेते हैं, पर उसका पाचन न होने से या एलर्जी के कारण उनकी मृत्यु होने की आशंका रहती है।
ज्योतिषीय महत्व, योग, राहूदोष, कालसर्पदोष
नागपंचमी इस बार कार्यसिद्धि में मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता का अभिषेक करने से संकट दूर होंगे और मनोवांछित फल की प्राप्ति होगी।
राहू दोष और कालसर्प दोष की शांति के लिए नागपंचमी पर्व शुभ माना जाता है। नाग पंचमी पर नाग-नागिन के जोड़े को सपेरे से मुक्त कराया जाए तो नाग देवता की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता का रुद्राभिषेक करना चाहिए। राहू की महादशा अंतर्दशा और कालसर्प दोष की शांति के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है।
कालसर्प दोष कारण
राहू और केतु के मध्य सातों ग्रह आने पर कालसर्प दोष होता है। राहु और केतु के मध्य जब सभी सातों ग्रह आ जाते है तो पूर्ण कालसर्प दोष कुंडली में होता है। अगर एक ग्रह बाहर हो या मंगल के साथ अष्टम भाव में स्थित हो तो भी आंशिक कालसर्प दोष होता है। कालसर्प दोष एक पैतृक दोष है। बार बार हानि उठानी पड़ती है तथा घर और बाहर अपमानित होता है। ऐसे व्यक्ति का वैवाहिक जीवन भी अच्छा नहीं होता। जिस व्यक्ति को स्वपन में बार-बार सर्प दिखाई दें और खुद को व दूसरे को सांप मारता दिखे, पानी से डर लगता है, विधवा स्त्री दिखाई दे और पानी में गिरते हुए दिए, बार बार धन की हानि तथा हर कार्य बंधा हुआ लगे तो समझ लेना चाहिए कि कुंडली में कालसर्प दोष है। कालसर्प से संतान सुख में बाधा, वैवाहिक जीवन में कलह, धन हानि, लंबी बीमारी, प्रेत बाधा, मानसिक कष्ट, नौकरी में बाधा, व्यापार में घाटा, नशे का शिकार, शत्रुओं की अधिकता और किसी भी कार्य में तरक्की न होना होते हैं।
कालसर्प दोष निवारण उपाय
कालसर्प दोष की संपूर्ण शांति के लिए किसी विद्वान द्वारा नागपंचमी के दिन रुदाभिषेक,जप अनुष्ठान, नारायण नाग बली, त्रिपिंडी श्राद्ध, कालसर्प शांति यज्ञ करवाकर सिद्ध रक्षा कवच धारण किया जाना चाहिए। मोर पंख सदैव अपने घर में रखें। शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं तथा वहीं बैठकर जन्म पत्रिका दोष प्रकार आधारित निर्धारित संख्या में ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप विनियोग संकल्प सहित करें।

ज्योतिष सेवा केन्द्र लखनऊ
आचार्य कौशलेन्द्र पाण्डेय जी
मो.9455715061,8896344970