हिंदू धर्म की परंपरा के अंतर्गत हरियाली अमावस का दृश्य

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प्रवीण गौर ब्यूरो 

होशंगाबाद -लोक उत्सवों की परम्परा के क्रम में 20 जुलाई को मध्य प्रदेश के सावन शिवरात्रिभुवाण्या, निमाड़ और मालवा अंचलों में जिरोती अमावस मनाया गया ।
इस दिन प्रत्येक घर में गेरू और चॉक मिट्टी से बहुत सुंदर भित्ति चित्र बनाए गए ,जिनकी पूजा भी हुई।
इस भित्ति कला को बाकायदा देवी स्वरूप मानकर पूजा की जाती है । साथ ही ‘जिरोती’ माता से परिवार के स्वास्थ्य ,समृद्धि और सुख की कामना की जाएगी ।


बहुत ढूंढने पर भी इसका कोई पौराणिक या वैदिक कारण तो नहीं मिला, लेकिन पता चला कि सावन के महीने में घर की बहन बेटी आती हैं,और वे अपने माता-पिता के घर को सुंदर बनाने के उद्देश्य से ये भित्ति चित्र बनाती हैं ।
फिर पूरे एक वर्ष तक ये चित्र उन बहन बेटी की याद दिलाते रहते हैं।वे लोग बहुत किस्मत वाले माने जाते हैं,जहां ‘जिरोती’ होती है,क्योंकि वह बहन-बेटी से सम्पन्न घर होता है।