मानवता के उपासक और सिद्धांत वादी राजनीतिज्ञ थे डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी-सूर्यकांत सोनी

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नवील वर्मा ब्यूरों
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर बलिदान दिवस के रूप में मनाया गया जिसमें वीडियो कांफ्रेंस के जरिए बेतूल बाजार मंडल की बैठक को जिला उपाध्यक्ष सूर्यकांत सोनी ने संबोधित करते हुए कहा डॉक्टर मुखर्जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे एवं शिक्षाविद के रूप में विख्यात थे उन्होंने अपनी अल्पायु में कई उल्लेखनीय सफलताएं अर्जित कर ली थी 33 वर्ष की अल्पायु में कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और यह नियुक्ति को पाने वाले विश्व के सबसे कम आयु के कुलपति थे एक विचारक व प्रखर शिक्षाविद के रूप में उनकी उपलब्धि तथा ख्याति निरंतर आगे बढ़ती गई. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन की विशेषता थी अध्यात्म व सहनशीलता मानवीय गुणों एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं गहरी समझ थी यह विशेषता उनके पूरे जीवन में परिलक्षित होती रही मानव मात्र की सेवा को ही ईश्वर की सच्ची पूजा मानते थे।

कुलपति बनने का सौभाग्य डॉक्टर साहब को प्राप्त हुआ पहली बार दीक्षांत समारोह में भारतीय भाषा का प्रयोग हुआ ब्रिटिश साम्राज्य में यह असंभव कार्य को मुखर्जी जी ने संभव कर दिखाया उनके दीक्षा समारोह में बंगला भाषा में भाषण दिया गया डॉक्टर साहब ने शिक्षा से आजादी के लिएअलख जगाने के लिए राजनीति में प्रवेश किया और वह केंद्रीय मंत्री बने वह भी गांधी जी और सरदार पटेल के अनुरोध पर उन्होंने मंत्री पद को संभाल लिया और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी निभाई परंतु राष्ट्रीय हितों की प्रतिबद्धता के कारण उन्होंने मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया।ब्रिटिश सरकार की भारत विभाजन की गुप्त योजना और साजिश को कांग्रेस के नेताओं ने अखंड भारत संबंधी अपने वादों को ताक पर रखकर स्वीकार कर लिया उस समय डॉक्टर मुखर्जी ने बंगाल और पंजाब के विभाजन की मांग उठाकर प्रस्तावित पाकिस्तान का विभाजन कराया और आधा बंगाल का आधा पंजाब खंडित भारत के लिए बचा लिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर सह संचालक गुरु गोलवलकर जी से परामर्श कर भारतीय जनसंघ के नाम से एक नई पार्टी बनाई और एक कश्मीर के लिए उन्होंने एक प्रण लिया ।

परमिट प्रथा खत्म की जाएगी एवं एक देश दो विधान दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे इसी नारे के साथ भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ी और डॉक्टर साहब ने धारा 370 और 35a हटाने के लिए बड़ा संघर्ष किया बिना परमिट जम्मू कश्मीर जाने के लिए जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तार कर लिया और उसी स्थिति में उनकी मृत्यु हो गई । दलगत भावना से ऊपर उठकर विश्व के अनेक देशों के नेताओं ने भी उनकी मृत्यु पर गहरा शोक प्रकट किया और बताया मुखर्जी जी ने मानव जीवन की सेवा महान उद्देश्य चेतना के उच्चतम स्तर को प्राप्त किया। इस पुण्यतिथि पर हमें यह विशेष अवसर प्राप्त हुआ है कि उनके संकल्प को वर्तमान सरकार ने धारा 370 हटा कर हमने उन्हें एक सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है एवं उनके अधूरे कार्य को हम पूरा करेंगे डॉक्टर मुखर्जी जी तो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका बलिदान हमें मातृभूमि के लिए जीने के लिए सदैव प्रेरणा देता रहेगा ।मुखर्जी के पद चिन्हों पर चलते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जब से देश की बागडोर अपने हाथों में ली है तब से भारतीय संस्कृति की शिक्षा को आधार मानते हुए सारे विश्व में इसके प्रसार के लिए अग्रदूत की भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं श्री मोदी ने ना केवल भारतीय संस्कृति के ज्ञान को माध्यम बनाकर विश्व समुदाय को जीवन जीने का नवीन मार्ग बताया बल्कि भारत को एक बार फिर जगत गुरु के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है इस दृष्टिकोण को मोदी जी ने माय इंडिया ऑफ इंडिया के रूप में कई बार संसार के समझ रखा गया मुखर्जी के बताए रास्ते पर पार्टी चल रही है और निश्चित नए आयाम स्थापित कर रही है । इस बैठक में पूर्व जिला अध्यक्ष श्री जीतेंद्र वर्मा जी बेतूल बाजार नगर पंचायत के अध्यक्ष सुधाकर पवार जी मंडल अध्यक्ष सुनील पवार जी एवं पार्टी के सभी ज्येष्ढ श्रेष्ठ कार्यकर्ता बंधु शामिल हुए मंडल अध्यक्ष सुनील पवार ने सभी का आभार प्रदर्शन किया।