मामला आमला जनपद की 23 दुकानों का एसडीएम ने जांच कर प्रतिवेदन कलेक्टर को सौपा,जल्द हो सकती है बड़ी कार्यवाही

Scn news india

दिलीप पाल ब्यूरों आमला 

आमला.जनपद पंचायत आमला की दुकानों में हुई धांधली व अनियमितता के सम्बन्ध में लगभग 19 जनपद सदस्यों द्वारा विधायक डॉ योगेश पण्डागरे के माध्यम से कलेक्टर को ज्ञापन देते हुए मामले की जांच की मांग की थी । ज्ञात हो कि 23 दुकानों के आरक्षण व आवंटन प्रक्रिया को लेकर जनपद सदस्यो ने सवाल उठाए थे और जनपद अध्यक्ष पति पर आरोप लगाते हुए 23 दुकाने अपने चहितो को और जनप्रतिनिधि के रिस्तेदार को देने की बात कही थी जिसके बाद जनपद सीईओ संस्कार बावरिया ने भैतिक निरीक्षण किया था और शिकायतों के बाद जिला कलेक्टर ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मुलताई सीएल चनाप को जांच सौपी थी एसडीएम सीएल चनाप ने आज जांच प्रतिवेदन जिला कलेक्टर को सौप दिया है बताया जाता है कि दुकानों में जांच के दौरान कुछ ऐसे बिंदु सामने आए है जिनमे भारी अनियमितता पाई जाने की सम्भावना है।इस जांच के बीच मे ही कुछ दुकानदारो ने अपनी दुकानों से फ्लेक्स निकालेे और कुछ दुकानदारो ने दुकानों से बिजली के मीटर कटवा लिए जबकि कुछ ने जांच के दौरान कुछ दस्तावेज़ पेश किए है। जिससे कि जांच करने वाले अधिकारियों को भी यह स्पष्ट होता चला गया कि इस मामले में कुछ तो गड़बड़ी है क्योंकि जांच के पहले दिन में ही जनपद के अधिकारी ने दुकानों की पूर्व में ही वीडियोग्राफी कर ली गई थी। जिसके बाद जांच अधिकारी को भी यह बताया गया होगा जिससे यह मामला सन्देह में आता गया।मुख्य बात यह निकल कर भी आ रही है कि दुकाने जो कि ग्रामीण निवासियों को दी जानी थी जिसके लिए षड्यन्त्रकारियों ने शहर से कुछ लोगो के नाम कटवा कर ग्राम में जोड़े गए जिससे कि वह वहां का निवासी हो जाये जबकि आवंटन की शर्तों में निवासी उसे कहेंगे जो तीन वर्षों से अधिक उस पंचायत में रह रहे होंगे।लेकिन निवास की शर्तों के अनुसार उन बोलिकर्ताओ ने निवास प्रमाण पत्र भी दिए होंगे।अगर दुकानदारो ने निविदा के समय ही अपना नाम जोड़ा होगा तो निवास प्रमाण पत्र तो फ़र्ज़ी कहलायेगा जिसमे की सरपंच और सचिव की भूमिका भी सन्दिग्ध मानी जा सकती है।वही दुकान लेने वाले दुकानदार के अलावा जो दुसरे बोलिकर्ता द्वारा जमा होने वाले दस्तावेज़ में खामिया होने की सम्भावना है।जो कि दुकानों में साठगांठ की तरफ सीधा इशारा करता है।एक दुकान की बोली में केवल दो बोलीकर्ता ने बोली लगाकर दुकान ले ली है जबकि तीन बोलीकर्ता होना अनिवार्य रहता है या फिर पुनः उस बोली के लिए निविदा काल करनी पड़ती है।केवल एक ही निविदा में दुकाने क्यों आवंटित कर ली गई यह भी जांच के घेरो में थी।जिस तरह से इन 23 दुकानो का मामला 2 वर्ष पूर्व गरमाया था आज इस मामले में पूर्व से अधिक गरमाहट और तीव्रता दिखाई दे रही है। और जिस तरह से यह मामले में दिग्गज लोगो द्वारा शह और मात का खेल चल रहा है इनके बीच उन दुकानदारो की जरूर फ़ज़ीहत है जिन्होंने अपने पैसे भी फसाये और इन सब मुसीबतों का सामना भी करने को मजबूर होना पड़ रहा है।अगर दुकाने छल पूर्वक ली गई है तो इनमें दुकान लेने वाले भी और देने वाले भी धोखाधड़ी में फसेंगे। जबकि अब जांच एसडीएम द्वारा कर ली गईं है और जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौप दिया गया है।इस मामले में जो कुछ भी निर्णय लेना है वो कलेक्टर द्वारा लिया जाना है।

इनका कहना है:-

मेरे द्वारा जिन बिंदुओं पर जांच की गई है उनमें अनियमितता है जिसका जांच प्रतिवेदन कलेक्टर महोदय को भेज दिया गया है।

सी एल चनाप

एसडीएम,मुलताई