गूगल मीट पर हुआ ऑनलाइन कवि सम्मेलन का आयोजन

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स्वामी सींग दमोह

दमोह। अखिल भारतीय आॅनलाइन कवि सम्मलेन का आयोजन गूगल मीट पर किया गया जिसमें देश के नामचीन कवियों ने काव्य पाठ किया। सर्व प्रथम मां सरस्वती की वंदना से यह काव्य समारोह प्रारंभ हुआ, जिसमें इंदु उपाध्याय ने माँ सरस्वती की वंदना की। इस कवि सम्मेलन का प्रारंभ करते हुए पहले कवि के रूप में दीपक पंकज बिहार ने कहा कि पास तेरे मैं तेरा हो जाता हूँ, बेगाने राहों में कहां खो जाता हूं पढ़ा। मंच का संचालन कर रहे चेतन शर्मा देदला धार म.प्र ने चुटीले स्वर में कहा कि सीख रहा हूँ जलेबियों से गूढ़ ज्ञान की शिक्षा को, सदा प्राप्त करती है उलझकर भी मिठास की दीक्षा को, वीर रस के कवि कृष्णा सेंदल तेजस्वी राजगढ़ म.प्र. ने कहा कि उठकर भूमि से मैं आसमान हो जाऊं, चढ़ हिमालय सा अभिमान हो जाऊं, हेमा श्रीवास्तव प्रयागराज ने दिव्यांगों का पक्ष रख कर कहा कि ना खेले-खेल बचपन के न देखे ही खिलौने है, डॉ. आभा माथुर ने बचपन याद करते हुए कहा कि सूट-टाई से सज कर बन्दर, ट्रे लेकर तब आया, गर्म गर्म कॉफी का कप, सब लोगों को पकड़ाया। पंकज त्रिपाठी मकरन्द ने श्रृंगार में डूबते हुए कहा कि तेरे मन मंदिर के गोरी संन्यासी बन जायेगे, इंदु उपाध्याय ने गीत पल-पल में उनकी याद सताये तो क्या करूँ, उनका ख्याल दिल से न जाए तो क्या करूँ के माध्यम से विरह व्यक्त किया। डॉ. आरती कुमारी बिहार ने तेरी मेरी प्रीत पुरानी जैसे चाँद चकोर, सागर से भी गहरी है ये जिसका ओर न छोर सुंदर गीत प्रस्तुत किया। डॉ. पुष्पा चिले दमोह म.प्र ने कहा कि हर पल छवि झूले है अखियन प्रीतम बिन बैचैन हुआ मन, ताकत नैन हो गए बेहाल ए सखि साजन, न सखि गोपाल। वासुदेव साव वृन्द महासमुंद (छ.ग) ने कहा कि सबके मन में देश प्रेम की भावना तब आयेगा, ’भारत का रहने वाला, जब भारतीय कहलायेगा। डॉ. रघुनन्दन चिले दमोह म.प्र ने व्यंग के बाण चलाते हुए कहा कि भीड़ बढ़ी सन्तों की इतनी लेकिन नन्दन हुआ न कोई कबीर, गजब की गदर मची है। आभार डॉ. रघुनन्दन चिले ने माना। अंत में कल्याण मंत्र सर्वे भवन्तु सुखिनः के साथ इस कवि सम्मेलन का समापन हुआ।