बंदरों के काटे जाने से घायल हो रहे लोग, करैरा अस्पताल में नहीं दो माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन

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  • बंदरों के काटे जाने से घायल हो रहे लोग, करैरा अस्पताल में नहीं दो माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन
  • मनमाने दामों पर बिक रहे मेडिकल स्टोर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन
  • अपने ही घरों की छतों पर जाना हुआ मुश्किल

स्वप्निल जैन ब्यूरों 

खनियांधाना।
करैरा-छत पर अगर कोई खाद्य सामग्री सुखाना हो या कपड़े सुखाने जाना हो तो सावधान हो जाइए आपके घरों की छतों पर आतंकी बंदरों का झुंड डेरा डाले बैठा हुआ है। बंदरों की बढ़ती आबादी पर न स्थानीय नगरीय प्रशासन ध्यान दे रहा है और न ही वन विभाग। बंदरों के काटे जाने के मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं, लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन करैरा अस्पताल में पिछले दो तीन माह से बिल्कुल नहीं लगाए जा रहे हैं। बंदरों और कुत्तों के काटे जाने पर गरीब लोगों को बाजार से मनमाने दामों पर एंटी रेबीज इंजेक्शन खरीदना पड़ रहे हैं।

इन बंदरों की वजह से स्थानीय लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। दूसरी तरफ आतंकी बंदरों से जनता इतनी भयभीत बनी हुई है कि आम रास्ता पर चल रहे राहगीरों के हाथों से यह उत्पाती बंदर सामान छीन ले जाते हैं, साथ ही छत पर कोई खाद्य सामग्री डली हुई है तो नजर झपकते ही बंदरों का हुजूम एक दम से इकट्ठा हो जाता है। करैरा नगर में बंदरों का इतना आतंक बढ़ गया है। इनकी धमाचौकड़ी से करैरा वासियों का जीना मुहाल हो गया है।

बीस साल पहले नपा  ने पकड़वाए थे आतंकी बंदर

नगर परिषद करैरा के द्वारा 1994 में नगर में बढ़ते बंदरों के आतंक से छुटकारा दिलाने के लिए मथुरा की टीम के द्वारा बंदरों को पकड़ कर जंगलों में छोड़ा गया था। उसके बाद से आज तक न वन विभाग ने ध्यान दिया और न ही नप ने। यह दोनों विभाग आपस में एक-दूसरे पर कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे है।

बंदरों के झुंड को देखकर घायल हो रहे लोग
करैरा में बंदरों का आतंक इतना ज्यादा बढ़ गया है कि महिला पुरुष बच्चे अपने ही घर में पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अभी हाल ही में 15 मई को वार्ड 5 मोती मस्जिद के पास रहने वाले गफ्फार खान टेलर की पत्नी को बंदरों ने काट लिया था, जो बुरी तरह लहूलुहान हो गई थी, इससे पूर्व भी कई घटनाएं हो चुकी हैं।

इनका कहना है

♦नगर में बंदरों का आतंक बहुत ज्यादा बढ़ गया है। नगर परिषद और वन विभाग बिलकुल भी ध्यान नहीं दे रहा है। जब तक बंदरों को पकड़ कर जंगल में नही छोड़ा जाएगा, तब तक इनके आतंक से निजात नहीं मिल सकती है।

अनीश खान, करैरा निवासी

♦बंदरों के बढ़ते आतंक के कारण मोहल्ले के लोगों ने चंदा वूसूली करके बड़े-बड़े पिंजरे बनवाए थे, जो अभी है, लेकिन वन विभाग और नप से मदद न मिलने के कारण कोई काम नहीं ले पा रहे हैं। अगर हम बंदरों को पिंजरे में बंद भी कर लें तो जंगल में छोड़ने कौन जाए।

सोनू दुबे, पार्षद वार्ड-2

♦बंदरों की संख्या इतनी ज्यादा हो गई है कि जब भी इनको पकड़ा जाता है तो यह सभी भाग जाते हैं। फिलहाल हम जल्द ही परिषद की बैठक में इन बंदरों के बढ़ते आतंक को लेकर एक प्रस्ताव डालेंगे और इनको फिर से जल्द पकड़वाया जाएगा।

दिनेश श्रीवास्तव, सीएमओ करैरा।

♦करैरा अस्पताल में पिछले दो माह से एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं है। इसकी डिमांड भी हम भेज चुके हैं, लेकिन अभी तक हमको प्राप्त नहीं हुए।

डॉ. प्रदीप शर्मा, बीएमओ।