अजयगढ़ से नहीं मिलती वाहन सुविधा, प्रवासी श्रमिकों का आरोप पैदल गृहग्राम पहुंचने को मजबूर लोग, वाहन संचालक कर रहे मनमानी वसूली

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मोहम्मद आज़ाद
अजयगढ़= जिला मुख्यालय के शेल्टर होम में प्रतिदिन कई सैकड़ा प्रवासी श्रमिक दूसरे राज्यों व महानगरों से वापस पहुंच रहे हैं। यहां से श्रमिकों को सक्रीनिंग और भोजन के बाद बसों के माध्यम से उनके तहसील क्षेत्र में पहुंचाकर वहां भी स्क्रीनिंग करवाई जाती है। और प्रत्येक श्रमिक को कोरोना संक्रमण से बचाव और फैलाव की समझाईस देकर 14 दिनों तक होम आईसोलेट होने की सलाह दी जाती है।

अधिकतर तहसील क्षेत्रों में व्यवस्था लगभग ठीक चल रही है पर अजयगढ़ तहसील मुख्यालय में पहुंचने वाले प्रवासी श्रमिकों को स्क्रीनिंग और भोजन उपरांत पैदल ही अपने गृह ग्राम की ओर रवाना होना पड़ता है। यहां से नाम मात्र लोगों को वाहन सुविधा उपलब्ध हो पाती है, अधिकतर श्रमिक परिवार सहित घण्टों वाहन सुविधा का इंतजार कर अपने गांव के लिये पैदल रवाना हो जाते हैं। अजयगढ़ तहसील मुख्यालय से अपने गांव की ओर पैदल जाने वाले श्रमिकों का कारवां रात के अंधेरे और दिन की तपती धूप में भी देखा जा सकता है। आपको बता दें कि यह जिम्मेदारी तहसील मुख्यालय में तहसीलदार और एसडीएम को सौंपी गई है जिसमें अजयगढ़ क्षेत्र के प्रवासी श्रमिकों द्वारा लापरवाही के आरोप लगाये जा रहे हैं।

3-3 हजार में देहरादून से अजयगढ़ पहुंचे, पैदल जाना पड़ा घर
21 मई 2020 को सुबह लगभग 2 दर्जन से अधिक प्रवासी श्रमिक देहरादून से बस बुक कर अजयगढ़ पहुंचे श्रमिकों ने बताया कि बस संचालक द्वारा उनकी मजबूरी का फायदा उठाते हुये 3 साल तक के बच्चे का 3000 रुपये किराया वसूला गया, कुल 28 लोगों का 84000 किराया लिया गया, घर पहुंचने की चाह में संकट में फंसे गरीब प्रवासी श्रमिकों ने बस संचालकों की मुंह मांगी रकम उन्हें सौंप रवाना हुये जिन्हें अजयगढ़ में स्क्रीनिंग के लिये रुकना पड़ा और दिन भर इंतजार करने के बाद वाहन सुविधा नहीं मिलने से उन्हें गांव से पिकअप और टैक्टर मगवा कर जाना पड़ा, वहीं कुछ लोगों को पैदल ही अपने गृह ग्राम पहुंचना पड़ा, श्रमिकों ने बताया कि देहरादून से हेल्पलाइन नंबर पर काफी समय से संपर्क किया जा रहा था पर सहायता नहीं मिलने और राशन समाप्त होने, वहां के स्थानीय लोगों द्वारा परेशान किए जाने से उन्हें किराए की बस में मनमाने किराये पर बुक करना पड़ा।

इनका कहना है-

रात में श्रमिकों के ठहरने की सुविधा की गई है, पर कुछ लोग रुकना नहीं चाहते रात में बसों के चालक भी नहीं मिलते जिससे सुबह बस भेजी जाती है। कुछ लोग पैदल ही रवाना हो जाते हैं। अजयगढ़ में श्रमिकों के लिये बेहतर भोजन व्यवस्था की गई है। 21 मई को देहरादून से कुछ श्रमिक आये थे जिन्हें बस क्यों उपलब्ध नहीं कराई जा सकी इसकी जानकारी नहीं है, क्योंकि आज मैं फील्ड पर था।
धीरज गौतम, तहसीलदार अजयगढ़,