एसडीओ ने माना पस्तलाई तालाब में चली मशीनें, उपयंत्री को दिया नोटिस

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दिलीप पाल ब्यूरों आमला
आमला ब्लॉक के रैय्यत पस्तलाई में मनरेगा के तहत बन रहे तालाब में मशीनों का उपयोग होना सिद्ध हो गया। आरईएस के एसडीओ अंनत चौधरी ने निर्माण स्थल का निरीक्षण करने के बाद मशीनों का उपयोग किए जाने पर उपयंत्री को नोटिस देकर दो दिन में जबाब मांगा है। एसडीओ के इस नोटिस से लगातार प्रकाशित खबरो पर प्रमाणिकता की मोहर लग गई। अब देखना यह है कि मनरेगा के काम मे मशीन का उपयोग करने पर उस उपयंत्री पर क्या कार्रवाई की जाती है। वहीं इस मामले में अब जांच होने तक भुगतान भी रोका जाना चाहिए। रैय्यत पस्तलाई का यह मामला इस बात की गवाही दे रहा कि लॉक डाउन में मजदूर नियोजन के जो काम खोले गए हैं उनमें मैदानी अफसर, कर्मचारी शासन के मूल उद्देश्य को पलीता लगा रहे हैं। जो उपयंत्री यहाँ पूरा काम देख रहा वह अपने अधिकारियों को भी अंधेरे में रख रहा

– यह पस्तलाई मामले में आरोप…
1. यहाँ पर मजदूर की जगह मशीनों से निर्माण कराया गया।
2. मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टररोल भरे गए।
3. जो निर्माण किया गया उसमे गुणवत्ता ही नहीं है।
4. अधिकारियों ने ठेकेदारी सिस्टम में काम कराया।
5. दिन में निर्माण की जगह रात के वक्त काम करवाया।
6. घटिया निर्माण से तालाब का भविष्य खतरे में है।

अब वेस्टवेयर की होगी पड़ताल
इस तालाब का दो रात में मशीनों से निर्माण कराया गया उसके बाद वेस्टवेयर निर्माण में भी धांधली की जा रही। इस बात को राष्ट्रीय दिव्य दुनिया ने बुधवार को अपनी खबर में उल्लेखित किया है। अब एसडीओ चौधरी का कहना है कि फिर से इस साइट की विजिट कर देखेंगे और यदि गड़बड़ी मिली तो ईई के संज्ञान में लाकर उपयंत्री पर ठोस काईवाई करेंगे। यह कार्रवाई उसे हटाने से लेकर सस्पेंशन तक कुछ भी हो सकती है।

भुगतान को लेकर जल्दी कर रहे
बताया गया कि इस तालाब निर्माण में करीब साढे़ पांच लाख का भुगतान हो चुका है वही करीब 25 से 30 लाख के बिल लगाए जा रहे हैं। चूंकि मामला हर स्तर पर सुर्खियों में आ चुका ऐसे में जिन नेता नुमा ठेकेदारों ने यह निर्माण किया वे पैसा न उलझ जाए इसलिए भुगतान को लेकर दबाब बना रहे और हायतौबा मचा रहे है। चूंकि एसडीओ ने मशीन से काम कराने की बात स्वीकार की है ऐसे में यह भुगतान बिना जांच के नहीं किया जाना चाहिए। बिना जांच भुगतान होने पर कई और भी सवाल खड़े हो जायेंगे।

इनका कहना …
मामला संज्ञान में आने के बाद फील्ड विजिट की थी, वहां मशीन का उपयोग होना सामने आया है, उपयंत्री को नोटिस भी दिया गया है। यदि चट्टान आदि में मशीन की जरूरत आ रही थी तो वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन और अनुमति लेना था जो नहीं ली गई।
अनन्त चौधरी, एसडीओ, आरईएस, आमला