माँ तो माँ होती है – बेटी को नींद आई तो मां ने सड़क पर पल्लू बिछाकर सुलाया

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बाहर से गेहूं काटकर लौटे मजदूरों को घर जाने नहीं मिल रहे साधन, हाईवे को बनाया
आशियाना

लॉकडाउन के वजह से फंस गए हैं मजदूर

स्वप्निल जैन ब्यूरों 

खनियांधाना।
रोजगार की तलाश में दूसरे जिले और राज्यों में गए मजदूर लॉक डाउन  की वजह से परेशान हैं। परिवहन सेवा बंद रहने से मजदूरों को घर जाने के लिए बसें व दूसरे साधन नहीं मिल रहे हैं। मजदूर परिवारों के रास्तों में रातें बिताते हुए घरों की तरफ कदम धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। पडोरा चौराहे से 5 किमी आगे कोटा-झांसी फोरलेन हाइवे पर कुछ मजदूर परिवार सड़क के बीचों बीच डिवाइडर पर आराम करते नजर आए। थककर हारी बच्ची सरोज आदिवासी को सुलाने के लिए मां सुदामा आदिवासी ने साड़ी का पल्लू बिछा दिया। बच्ची डिवाइडर पर बेसुध होकर नींद ले रही थी। वहीं नंद-भौजाई अनीता ओर प्रीति पौधे की जरा सी छांव में गहरी नींद में सोई मिलीं। चिल्लाकर लगाने पर भी नींद नहीं खुली। दूसरी महिला ने बताया कि दोनों नंद भौजाई हैं। पिछोर तहसील के रही गांव जाना है। लेकिन कोई साधन नहीं मिल रहा। बाहर गेहूं काटने गए थे। कोई साधन नहीं मिल रहा है, इसलिए पैदल ही घर जाने को मजबूर हैं।
दूसरे राज्यों से लौट रहे मजदूरों में महिला सुदामा आदिवासी पड़ोरा फोरलेन पर डिवाइडर पर व अपनी बच्ची सरोज को सुला कर थकान मिटाती हुई