बाल विवाह रोकथाम की कार्यवाहियां जारी, 7 दिन में रोके 10 बाल विवाह

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स्वप्निल जैन ब्यूरों
खनियांधाना।
शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के पवा बसई गांव में 16 वर्षीय बालक के बाल विवाह की सूचना पर पहुंची टीम ने जब परिजनों से उम्र के दस्तावेज मांगे तो उन्होंने कोई प्रमाण नहीं दिया। टीम सदस्यों से शिकायतकर्ता का नाम पूछने पर अड़े परिजन दो घण्टे की समझाइश के बाद विवाह न करने को राजी हुए। उल्लेखनीय है दो दिन पूर्व भी इसी गांव में 3 बाल विवाह रोकथाम की कार्यवाही की गई थी।
पवा बसई गांव के आदिवासी समाज में 16 वर्षीय किशोर के 4 मई को होने वाले बाल विवाह की सूचना चाइल्ड लाइन नंबर 1098 पर मिली। जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेन्द्र सुंदरियाल ने सूचना की जांच हेतु कोलारस परियोजना अधिकारी पूजा स्वर्णकार, पर्यवेक्षक सुमन वर्मा, चाइल्ड लाइन समन्वयक वीनस तोमर एवं विनोद परिहार को भेजा। गांव में पहुंचने पर जब परिजनों से बालक की उम्र के प्रमाण मांगे तो उन्होंने अनपढ़ बताकर प्रमाण देने में आनाकानी की। जब किशोर की उम्र के संबंध में पूछा तो परिजन बोले 18 साल है। परियोजना अधिकारी ने उन्हें बताया कि लड़के का विवाह 21 वर्ष से पहले करना दंडनीय अपराध है। जब सजा के कानूनी प्रावधान बताए तो परिजन विवाह न करने पर राजी हुए तथा लिखित बचनपत्र दिया कि अब 21 वर्ष उम्र होने पर ही बाल विवाह करेंगे। मौके पर मौजूद ग्राम पंचायत सचिव शिशुपाल यादव ने भी टीम को भरोसा दिलाया कि वे बाल विवाह नही होने देंगे। जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र सुंदरियाल ने चाइल्डलाइन एवं सेक्टर पर्यवेक्षक को नियमित रूप से निगरानी करने हेतु निर्देशित किया है। जिला कार्यक्रम अधिकारी देवेंद्र सुंदरियाल ने बताया कि आदिवासी बाहुल्य पवा बसई गांव के ग्रामीणों को टीम के द्वारा बाल विवाह के दुष्प्रभाव एवं सजा के प्रावधानों से परिचित कराया है। तीन दिनों में एकही गांव में 4 बाल विवाह होने की शिकायतें मिलना गंभीर है। सेक्टर सुपरवाइजर एवं चाइल्डलाइन को निगरानी के लिये कहा गया है। गांव में जागरूकता के लिये प्रयास जारी रहेंगे।