पोल्ट्री फार्म संचालको को हो रहा भारी नुकसान ,,,लॉक डाउन के चलते बंद है दुकानें ,,,,

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दिलीप पाल ब्यूरों आमला
आमला।ब्लाक के दर्जनों पोल्ट्री फार्म संचालको को कोरेना संकट व लॉक डाउन के चलते भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है ।इस नुकसान का प्रमुख कारण शहर में चिकन दुकान बंद रहना बताया जा रहा है । व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि 24 मार्च से आज दिनांक तक लगभग 1 महीना हो चुका है। तथा शुरुवात से 40 दिन में अपने पूर्ण आकर और वजन में आ जाते है।ऐसी स्थिति में पोल्ट्री फार्मर मुर्गे सप्लायरों द्वारा खरीदी कर नही ले जाने से 70 दिनों से पोल्ट्री फार्म में मुर्गों को दाना खिलाकर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है ।बताया जाता है आमला ब्लाक में लगभग 15 से ज्यादा पोल्ट्री फार्म है जिनमे लगभग 50 हजार मुर्गे है।ऐसे में फार्मर को दाना ,आहार खिलाने से हजारो का नुकसान उठाना पड़ रहा है ।इस मामले में फार्मरों का कहना है कि चिकन दुकान पूर्णत बन्द है वही प्रशासन द्वारा होम डिलीवरी का कहा जा रहा है जबकी जिंदा मुर्गा मुर्गियों की होम डिलीवरी नही हो सकती है ।गौरतलब होगा कि राज्य सरकार द्वारा पोल्ट्री व्यवसाय को लॉक डाउन से मुक्त रखा है ।जिला प्रशासन द्वारा चिकन दुकानें शुरू नही करवाई जा रही है जिससे पोल्ट्री फार्म में संकट स्थिति बन रही क्योकि कई फार्मर रोजाना दाना खरीद पाने की स्थिति है ऐसे में उनके फार्म की मुर्गियां मरने की कगार पर है।
20 अप्रैल से इन लोगों को भी छूट मिलेगी ताकि यह अपना स्टॉक बेच सकें, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। वर्तमान में ब्लाक में फार्मो में बॉयलर मुर्गियों का पालन हो रहा है और लगभग इतनी ही संख्या में देशी मुर्गियां भी पाली जा रही है।इस बारे में
जब कुछ मुर्गी पालन व्यवसाय में लगे लोगों से बात की तो जानकारी मिली की मुर्गियों की औसत पालने की उम्र 38 से 50 दिन की होती है लेकिन लॉग डाउन के कारण 70 से 90 दिनों की मुर्गी अभी पालनी पड़ रही है और इसी कारण इन मुर्गियों को रोग से बचाव के लिए लगने वाले टीकों की प्रभाव क्षमता समाप्त हो चुकी है और बढ़ती गर्मी के चलते इनमें कभी भी संक्रमण के होने से रोग पनपने की गंभीर घटना भी सामने आ सकती है।

इन व्यवसायियों ने यह भी बताया कि जिले में मुर्गी पालन कृषकों का लगभग तीन से चार करोड रूपया इस व्यवसाय की गतिविधियों में लगा हुआ है साथ ही देसी मुर्गियों के व्यवसाय में भी इतनी ही राशि का व्यय हुआ है और लाक डाउन के चलते इन व्यवसायियों को बड़ा नुकसान होना निश्चित है।

विभिन्न स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के विभिन्न विकास खंडों में वर्तमान स्थिति में विभिन्न मुर्गी पालन फार्म हाउसों में लगभग ढाई लाख मुर्गियों / बॉयलर का स्टॉक है।