मिटटी के कारीगरों की मुसीबतें बढ़ी, समय निकलने पर वर्ष भर कारीगरों पर रहेगा आर्थिक संकट

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नवील वर्मा ब्यूरों शाहपुर 

1 माह से मिट्टी का कार्य करने वाले कारीगरों के बर्तन की बिक्री ना होने के कारण कारीगर के सामने एक बड़ा संकट आ गया है। मार्च और अप्रैल के माह में यह बर्तन की बिक्री सबसे ज्यादा होती है और उचित दाम मिलता है।
लेकिन लागडाउन के कारण यह समय निकल जाऐगा और यह समय निकल जाने के बाद यह बर्तन की बिक्री कम हो जायेगी साथ हि उचित दाम भी नही मिलेगा और पूरे वर्ष भर यह कारीगरों को इंतजार करना पड़ेगा।


कोरोना कोविड 19 संक्रमण और लागडाउन की इस मुश्किल घड़ी में साथिया वेलफेयर सोसाइटी संस्था के कार्यकर्ताओ द्वारा अलग अलग सराहनीय प्रयास किए जा रहे है। जिसमें मिट्टी का कार्य करने वाले कारीगरों के लिये कारीगर द्वारा बनाये गये फेडरेशन से बिना ब्याज़ पर लोन देने की सुविधा और एस पी वी द्वारा मिट्टी से बने तैयार बर्तन की उचित दाम पर खरीदी कर रही है अभी 20 से अधिक परिवार की 70 हजार रू से अधिक कि आर्थिक मदद की ज़ा चुकी है और प्रकिया जारी है जिससे किसी भी परिवार को दिक्कतो का सामना ना करना पड़े और मिट्टी का कार्य करने वाले कारीगरों की दैनिक आर्थिक ज़रूरत पूरी हो सकें और आर्थिक परेशानियों का सामना ना करना पड़े। लेकिन एस.पी. वी. और कारीगरों के फेडरेशन के पास सीमित आर्थिक व्यवस्था होने के कारण कारीगरों कुछ समय तक हि मदद हो पायेगी, उसके बाद क्या होगा यह चिंता का विषय है।

इसके साथ ही संस्था प्रशासन के साथ मिल कर सामाजिक दूरी और लॉक डाउन के नियमो का पालन करने का संदेश स्थानीय स्तर पर समुदाय को दे रही है। साथ ही निःशुल्क मास्क का वितरण, घर दुकाने व नुक्कड़ पर कोरोना के संक्रमण से बचाव व सही जानकारी के पोस्टर लगा रही है और संस्था के कार्यकर्ताओं द्वारा हेंडपम्प के पास गोल घेरा बनाया जा रहा है ताकि दूरी का पालन हो व हाथ धोने के लिए साबुन रख रहे हैं। कोरोना के विरुद्ध इस जंग में हम सब को मिलजुल कर प्रयास करने होंगे तथा प्रशासन का सहयोग करना होगा तभी सामाजिक जीत होगी।
सामाजिक कार्यकर्ता श्री जितेन्द्र प्रजापति व स्थानीय कारीगर सरकार से अपिल करते है कि आने वाले आर्थिक संकट के दौर में सरकार हाथ से कार्य करने वाले कारीगरों के हित में निर्णय लेकर सहयोग प्रदान करें।