जिला जेल के कैदियों के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग ने बनाई पीपीई किट

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कोरोना मरीज के उपचार के दौरान चिकित्साकर्मियों द्वारा पहनी जाती है पीपीई किट
बैतूल,
कोरोना के विरूद्ध युद्ध में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए उपयोग की जाने वाली पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) किट की अब जिले में कमी नहीं रहेगी। स्थानीय जिला जेल के कैदियों द्वारा जिले में ही अब ये किट्स तैयार करना प्रारंभ की गई है। जिसके लिए कैदियों को सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई है। इस किट की सिलाई पर मात्र 20 रूपए लागत आ रही है। किट निर्माण में उपयोग आने वाली सामग्री स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीसी चौरसिया ने बताया कि पीपीई किट तैयार करने के लिए आवश्यक सामग्री नजदीकी जिले छिंदवाड़ा से बुलाई गई है। इस किट को तैयार करने में सांसद श्री डीडी उइके  द्वारा प्रदाय की गई सांसद निधि की राशि का उपयोग किया जा रहा है। डॉ. चौरसिया ने बताया कि जिला जेल के बंदियों द्वारा एक पखवाड़े पूर्व मास्क तैयार कर वितरित किए जा चुके हैं।
जिला चिकित्सालय की चिकित्सा अधिकारी डॉ. अंकिता सीते ने बताया कि 30 पीपीई किट कैदी राहुल, बस्तीराम, नितेश, हेमंत एवं गौना के द्वारा सिलवाई गई, जिसकी पैकिंग में रमेश जैन, विजया पोटफोड़े, अलका गलफट, राजेश बोरकड़े द्वारा सहयोग दिया गया।
इसके अलावा जिले में कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए कार्य कर रही स्वास्थ्य विभाग की टीम में शामिल खण्ड चिकित्सा अधिकारी शाहपुर डॉ. शैलेन्द्र साहू ने अन्य देशों की कोरोना के विरूद्ध प्रसारित वीडियो क्लिपिंग में डॉक्टर्स को फेस शील्ड पहने देखा तो सोचा कि यह फेस शील्ड स्वयं के बचाव के लिये अत्यंत आवश्यक है जिसे बैतूल जिले में भी होना चाहिये। जब ऑनलाईन एवं स्थानीय बाजार में खोजने पर भी यह उपलब्ध नहीं हुई तो डॉ. साहू द्वारा साड़ी की पैकिंग में से प्लास्टिक शीट निकालकर हेयर बेंड, टेप, इलास्टिक एवं फेविकॉल के सहयोग से कोरोना फाइट में स्वास्थ्य कर्मियों के सेल्फ प्रोटेक्शन (स्वयं के बचाव) के लिये फेस शील्ड का निर्माण किया गया। उनके इस अभिनव प्रयास को सराहा जाकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा इसे पीपीई किट के साथ सम्मिलित किया गया। जिसे अब समन्वित रूप से बनाया जा रहा है।