पांचवें दिन समाप्त हुआ पन्ना जिले के पत्रकारों का अनशन जिला प्रशासन ने 30 दिन में मांगें पूरी करने का दिया आश्वासन

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मोहम्मद आज़ाद
पन्ना। जिले सहित संपूर्ण प्रदेश एवं देश भर में बढ़ते भ्रष्टाचार, अन्याय, अत्याचार एवं माफियाराज के खिलाफ आवाज उठाने और सच्चाई उजागर करने वाले लोकतंत्र के चैथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों की हत्या, जानलेवा हमले, एवं झूठे मुकदमे दर्ज किए जाने के विरोध में एवं पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर 20 जून 2019 से अनिष्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पन्ना जिले के पत्रकारों को प्रषासन द्वारा मनाने के काफी प्रयास किए गए परंतु अपनी मांगों पर अटल पत्रकार अनशन पर डटे रहे, शुरुआत में अमित सिंह राठौर ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की जिसके चैथे दिन 23 जून 2019 को ककरहटी के वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी कैलाशनाथ त्रिपाठी भी अमित सिंह राठौर के साथ आमरण अनशन पर बैठ गये।

 

सत्ता एवं विपक्ष के नेताओं द्वारा भी पत्रकारों की मांगों को जायज बताया जा रहा था, जिसके बाद जिला प्रशासन पत्रकारों की मांग को मानने के लिए मजबूर हो गया और समस्त मांगों पर सहमति जताते हुए 30 से 45 दिन में मांगों के निराकरण के अस्वाशन पर पन्ना जिला एवं तहसील स्तर के पत्रकारों की सहमति पर अनशन पर बैठे अमित सिंह राठौर को अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीकेएस परिहार एवं कैलाशनाथ त्रिपाठी को अपर कलेक्टर जेपी धुर्वे ने जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया और पत्रकार अमित सिंह राठौर पर हमला करने वाले ठेकेदार के आदमियों पर कार्यवाई एवं फर्जी मुकदमे की जांच करवाकर शीघ्र खात्मा लगाने का आष्वासन, पत्रकारों की बैठक व्यवस्था हेतु भवन आवंटन, पत्रकार कॉलोनी के लिए जमीन, चिकित्सा सुविधा, अग्रणी शिक्षण संस्थाओं में रिजर्व सीट एवं जिले के सभी पुलिस थानों में जिला एवं तहसील स्तर के पत्रकारों की सूची भिजवाने की मांग रखी गई थी, जिसे जिला प्रशासन द्वारा मानते हुए 30 से 45 दिन के अंदर पूरा करने सहित पत्रकार सुरक्षा कानून के लिए प्रदेश सरकार को पत्र लिखने का आश्वासन दिया गया, इस मौके पर अपर कलेक्टर जेपी धुर्वे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बीकेएस परिहार, पन्ना एसडीएम बीबी पाण्डेय, पन्ना तहसीलदार दिव्या जैन, एसडीओपी आरएस रावत, नगर निरीक्षक अरविन्द कुजूर सहित जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे, अब देखना यह है कि जिला प्रशासन एवं प्रदेश सरकार पत्रकारों की मांगों को कितना महत्त्व देते हैं। या फिर पत्रकारों को दोबारा आमरण अनशन के लिए मजबूर होना पड़ेगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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