पलायनवाद एक समस्या – महाराष्ट्र के सीमावर्ती क्षेत्र मे कौन लाएगा कोरोना पर जागरूकता

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मंडला पलायन की तैयारी

आशुतोष त्रिवेदी भैसदेही ब्यूरो scn news india

कोथलकुण्ड-विश्व में कोरोना वायरस का संक्रमण मुंह उठाये खड़ा है। कई देशों सहित भारत में भी कोरोना का अलर्ट जारी है सरकार वृहद स्तर पर कोरोना से बचाव एवं जागरूकता के साथ सार्वजनिक क्षेत्र में सभी आयोजन स्थगित कर दिए है। परीक्षाएं स्थगित हो चुकी है। लेकिन पेट की खातिर पलायन आज भी बदस्तूर जारी है।  फिर बात मंडला जिले की हो या बैतूल हालात एक जैसे नाही यहाँ से जाने पर रोक है नाही आने पर। बेचारा गरीब मजदुर नहीं जनता कोरोना क्या है। अपने और अपने परिवार के पेट की आग की खातिर सब कुछ लुटाने को तैयार है। ये नजारा जिले के हर बस स्टेण्ड पर देखने को मिल जाएगा। हालांकि मंडला में जागरूक पत्रकारों की वजह से दर्जनों लोग नागपुर पलायन करने से रुक गए और श्रमविभाग के अधिकारियों द्वारा समझाईश देने पर मजदुर मान गए। और जाना निरस्त किया। लेकिन बैतूल से मजदुर अभी भी पलायन कर रहे है।

रोजगार के लिए काम करने जाते है ग्रामीण महाराष्ट्र

इन पंचायतों से जाते है मजदूरी करने लोग 

महाराष्ट्र बार्डर से लगी हुई पँचायत के नाम

कोथलकुण्ड,उदामा, धाबा, डेडवाकुण्ड,जामुलनी, बानुर,खोमई ,पिपलना, जैसी और भी पँचायत है जहाँ से ग्रामीण पलायन करते है रोजगार के लीये
बताया जा रहा है कि यहाँ के ग्रामीण पूना, मुंबई, नाशिक, अमरावती, जैसी जगहों पर रोजगार न होने के कारण काम करने जाते है

जागरूकता हेतु ग्राम पंचायतों में कोई साधन नहीं 

कोरोना जैसी महामारी को देखते हुए अधिकारियों को पँचायत स्तर पर सरपँच सचिवों को निर्देशित करना चाहिए कि ग्राम स्तर पर  सर्वे  अभियान चलाकर, घर-घर जाकर जानकारी जुटाए की कौन-कौन व्यक्ति ग्राम से बाहर पलायन किये हुए है, और रोजगार की तलाश में किस स्थान पर गये है, जिससे उनके स्थान का पता चले और उसकी जानकारी पँचायत के पास उपलब्ध हो, जिससे पंचायतो को उन परिवारों के सदस्यों की जानकारी प्राप्त होगी  की महाराष्ट्र के किसी संक्रमित क्षेत्र में तो नहीं है और  इन्हें चिन्हित करने में भी आसानी होगी। पलायन का सिलसिला आज भी जारी है।