अवैध रेत माफिया है के मानते ही नही

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  • जिला प्रशासन की सांठ-गांठ से रामनई की गौचर भूमि में भारी अवैध उत्खनन
  • नहर के पुलों की दुर्दशा टूटने की कगार पर

अजयगढ़ = अजयगढ़ ग्राम पंचायत के समाजसेवियों एवं ग्रामीणों द्वारा एसडीएम अजयगढ़ को ज्ञापन देते हुए अवैध रेत माफियाओं की लिखित शिकायत की गई जिसमें बताया गया कि अजयगढ़ क्षेत्र की केन नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का काला कारोबार रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अनेकों शिकायत, ज्ञापन, धरना प्रदर्शन व चक्काजाम के बावजूद अधिकारियों व नेताओं की मिली भगत से रेत माफिया का विनाशकारी कारोबार जारी है। 17 मार्च 2020 ग्राम रामनई के किसानों में अजयगढ़ एसडीएम कार्यालय पर पहुंचकर लिखित शिकायती आवेदन प्रस्तुत कर बताया कि रामनई के श्याम डोमार के खेत खसरा क्रमांक 31 रकबा 1.720 हेक्टेयर में 37954 घन मीटर रेत उत्खनन फतह सिंह शेखावत के नाम स्वीकृत है। जिसके द्वारा आसपास 02, 03, 34, 60 की गोचर और बंजर भूमि में मशीनों से अवैध तरीके से रेत का उत्खनन किया जा रहा है। सिकायत पर एसडीएम बीपी पाण्डेय ने मौके पर ऑफिस से निकल कर खनन स्थल पर पहुंच कर निरीक्षण किया और वापस आकर शिकायत को निराधार बताया।

अधिकारियोें की कार्यप्रणाली पर ग्रामीणों ने उठाये सवाल
क्षेत्रीय ग्रामीणों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुये बताया कि फतेह सिंह शेखावत द्वारा गौचर भूमि पर मशीनों से अवैध रेत उत्खनन कर शासन को लाखों रुपए की क्षति पहुचाई जा रही है। पालतू और जंगली जानवरों के चरने की जगह नहीं बचने से जानवरों की भूख की वजह से मौत हो रही है। गौचर और बंजर भूमि में लगे हरे भरे पेड़ों को तहस-नहस किया जा रहा है। जिससे पर्यावरण की क्षति हो रही है, ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह विनाशकारी कृत्य खनिज और राजस्व अधिकारियों सहित जिला प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है। निरीक्षण और जांच के नाम पर पहुंचने से पहले अधिकारियों द्वारा रेत माफिया को फोन पर सूचित कर काम बंद करवा दिया जाता है।


इनका कहना है

मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने पर अवैध रेत उत्खनन नहीं पाया गया ग्रामीणों द्वारा झूठी शिकायत की गई थी।
बीबी पाण्डेय, एसडीएम अजयगढ़