मजदूरी में वृद्धि के लिए रेलवे रनिग रूम ठेका श्रमिकों किया प्रदर्शन

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दिलीप पाल आमला
आमला. रेलवे अंतर्गत रनिग रूम में काम करने वाले रेलवे के ठेका मजदूरों ने मजदूरी में बढ़ोतरी समेत अन्य मांगों को लेकर से रनिग रूम के सामने प्रदर्शन किया प्रदर्शन में महिला ठेका श्रमिक भी शामिल हुई। ठेकेदारों के अधीन काम करने वाले मजदूरों को न तो वाजिब मजदूरी मिलती है, और न ही अन्य सुविधाएं। यही हाल रनिग रूम में भी है प्रदर्शनकारी महिला प्रति सूर्यवंशी, पूनम मागरदे,शिला वर्मा,रीना ठाकुर,देवकी अतुलकर, यसवंती बाई, आदि ने बताया कि
सरकारी नियमानुसार रेलवे में काम करने वाले ठेका मजदूरों को रोजाना 403 रुपये दिया जाना चाहिए, लेकिन ठेकेदार इससे कम मजदूरी देते हैं। किसी को 250 रुपये तो किसी को 300 रुपये देकर ही काम चलाया जाता है, लेकिन रेलवे प्रशासन की ओर से इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया जाता है। जिससे मजदूरों में नाराजगी व्याप्त है। वेतन में वृद्धि करने, हर माह नियमित रूप से मजदूरी देने, की मांग की है वही मानदेय को लेकर हड़ताल का आह्वान किया है। लेकिन यदि शीघ्र ही मांगों पर रेलवे प्रशासन व ठेकेदारों की ओर से ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में हड़ताल व आंदोलन को और भी तेज तथा सख्त कर दिया जाएगा।
मानदेय का मैसेज आता कुछ है और मिलता कुछ है –
रनिंग रूम में कार्य कर रहे ठेका श्रमिक महिला प्रीति सूर्यवंशी ने बताया कि रनिंग मैन 8 घंटे काम कराया जाता है मानदेय के रूप में ₹5500 दिया जा रहा है जबकि ठेकेदार द्वारा बैंक से मानदेय हमारे खाते में डलवाया जाता है खाते में ₹9990 का मैसेज मोबाइल पर आता है लेकिन ₹5500 ही ठेकेदार द्वारा दिए जा रहा है बाकी का मानदेय ठेकेदार द्वारा वापस ले लिया जाता है ठेकेदार का कहना है कि इपीएफ और ठेका श्रमिक जो भोजन करते हैं उनका पैसा कटता है इस कारण से उनको ₹5500 का भुगतान किया जा रहा है ठेकेदार के मैनेजर का कहना है कि ₹5500 में काम करना है तो करो तो सभी को काम पर से निकाल दिया जाएगा । इस विषय मे जब मुख्य कर्मीदल नियंत्रक एस.एस श्याम से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि ठेका श्रमिको का कोई अनुबंद नही होता है वैसे ठेकेदार को 9990 रु या 8500 देना चाहिए ठेकेदार ओर ठेका श्रमिक का आपसी समंझस के चलते भुगतान किया जा रहा है। ओर जहां तक कम मानदेय देने की बात है तो ठेकेदार कहा से पैसे कामयगा उन ठेका श्रमिकों के भुगतान से ही तो कामयगा।