खबर छापने से तिलमिलाऐ छात्रावासों के अधीक्षकों ने कलेक्टर के नाम पत्रकारों के विरुद्ध ज्ञापन सौंपा

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अमित त्रिपाठी ब्यूरों गुनौर 

पन्ना में भ्रष्टाचार में लिप्त छात्रावासों के अधीक्षकों ने कलेक्टर के नाम पत्रकारों के विरुद्ध ज्ञापन सौंपा है हम आपको बता दें कि अब पत्रकारों को छात्रावासों की खबर का कवरेज करने और सच का आईना दिखाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ेगी…अधीक्षकों ने अपनी गलतियों पर पर्दा डालने और छुपाने के लिए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा…जिले के छात्रावासों में रह रहे अधीक्षक एवं अधीक्षिकाएँ अपने काले कारनामों को उजागर होते देख मीडिया और प्रशासन पर दबाब बनाना चाहते है मीडिया की छवि धूमिल करने पत्रकारों पर भी मैस में जहर मिलाने जैसे संगीन आरोप और पत्रकारों के द्वारा विज्ञापन के नाम पर पैसे मांगने जैसे अर्नगल आरोप लगाये जा रहे हैं ताकि कोई भी मीडिया कर्मी इनके काले कारनामों को उजागर करने की हिमाकत न करें…वहीं दूसरी ओर छात्रावासो में कवरेज करने गए पत्रकारों की झूठी शिकायत कराकर फर्जी FIR कराने का षडयंत्र भी विभाग के अधीक्षक और अधीक्षिकाओं के द्वारा रचने की खबर सुनी जा रही है….

अधीक्षिकों ने पत्रकारों को बिना अनुमति के छात्रावासों में प्रवेश करने और वीडियो बनाने के विरुद्ध ज्ञापन दिया है। आखिर ऐसा क्यों…? क्या पत्रकार छात्रावासों में रह रहे छात्र और छात्राओं से नहीं पूछ सकते हैं उनकी समस्या ऐसा लगता है कि अपने दिल का दर्द और छात्रावासों के काले कारनामे और समस्या मीडिया के सामने नहीं बता पाएंगे छात्र और छात्राएं इसी वजह से ताकि बेनकाब और उजागर न हों पायें अधीक्षकों और अधीक्षिकाओं के काले कारनामे।
अधीक्षकों ने मांग की है कि बिना अनुमति के किसी भी पत्रकार को छात्रावास में प्रवेश न दिया जाय किसी भी पत्रकार के विरुद्ध की गई रिपोर्ट पर अमल हो। कहीं मैस सामग्री में कोई पत्रकार जहरीला पदार्थ डाल दे तो उसका उत्तरदायी कौन होगा। छात्रावास में अभिभावक के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को प्रवेश न दिया जाय। अधीक्षकों की शिकायत पर शीघ्र कार्यवाही की जाय… अधीक्षक 24 घंटे डियूटी करते हैं उसकी भी समय सीमा निर्धारित की जाय। छात्रावासों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कमी है ..पूर्ण की जाय। सभी छात्रावासों में CC टी. व्ही. कैमरे लगवाए जाने जैसी 8 सूत्रीय मांगों के लेकर ज्ञापन दिया है….

वहीं जिले के मुखिया कलेक्टर कर्मवीर शर्मा से पत्रकारों की ओर से मांग है कि जिले में चल रहे सभी छात्रावास सुबह 9 बजे और शाम 5 बजे चेक कराए जाएं ताकि छात्र छात्राओं की वास्तविक उपस्थिति का पता चल सके एवं देर रात संयुक्त टीम गठित कर सभी छात्रावासों को चेक कराया जाय ताकि पता चल सके कि कौन से कर्तव्यनिष्ठ अधीक्षक और अधीक्षकाएँ अपने अपने छात्रावासों में 24 घंटे डियूटी करते है। चाहे आदिमजाति विभाग के छात्रावास हों या जन शिक्षा केंद्र के अथवा शिक्षा विभाग के जिन भी अधीक्षकों के पास डबल 2 – 2 छात्रावास है उनको एक ही छात्रावास का प्रभार दिया जाय। क्योंकि डबल छात्रावासों के प्रभार के चलते अधीक्षक या अधीक्षिकाएँ एक ही छात्रावास पर उपस्थित मिल सकते हैं तो स्वाभाविक सी बात है कि कोई एक छात्रावास चपरासी के भरोसे रहता होगा । बात यहीं खत्म नहीं होती है इसके अलावा भी अधिकतर अधीक्षक/अधीक्षिकाएँ छात्रावासों में उपस्थित न रहकर अधिकतर अपने-अपने घरों मे आराम फरमाते हैं…अब इसमें सवालिया निशान ये उठता है कि जब दिया तले ही अंधेरा है तो ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रावासों का क्या होगा हाल। कुछ अधीक्षक तो ऐसे भी देखे जा सकते है जो छात्रावास में न रखकर मुख्यालय के ऑफिस में अपना अटैचमेंट कराए है ….अब देखना है कि जिले के मुखिया इस कार्यवाही में कितने संवेदनशील नजर आते हैं….❓

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