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गरीबी और बेरोजगारी के अभिशाप से जिले की एक बड़ी आबादी को मुक्त कराने अलस्या पारधी लड़ सकते है विधान सभा चुनाव

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विशाल भौरासे की रिपोर्ट 
खबर मध्य प्रदेश के बैतूल से है जहां बैतूल में मामा के नाम से पहचाने जाने वाले अलस्या सोलंकी ने चुनाव लडने ताल ठोक दी है बता दे लगातार जिले भर के गरीब तबके की यथा संभव मदद करने वाले अलस्या सोलंकी (पारधी)
ऐसे व्यक्ति है जो गरीब परिवारों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। बैतूल में मामा के नाम से पहचान बनाने वाले अलस्या सोलंकी लगातार गरीबों की आवाज को मजबूती देने संघर्ष करने में कोई कसर नहीं छोड़ते है।
आजाद भारत में देश की सबसे बड़ी चुनौती है गरीबी
आलस्या पारधी का कहना है की देश में
आजादी के 76साल बाद भी भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती अगर कोई है तो , इसमें गरीबी सबसे प्रमुख है. गरीबी के अभिशाप से जिले की एक बड़ी आबादी को मुक्त कराने के लिए विभिन्न प्रयास करने वाले आलस्या पारधी ने यह भी कहा की जिले में लाखो युवा पड लिख कर रोजगार की तलाश कर रहे हैं।
रोजगार नही मिलने चलते जिले के पड़े लिखे युवा हो रहे नशे के आदी
ओर रोजगार नही मिलने की स्थति में युवा पीढ़ी हताश होकर मजदुरी करके जीवन यापन करने को मजबूर है। इनमे से कुछ युवा तो मन दुःखी करके नशे के आदी होते जा रहे। इसका सबसे बड़ा कारण बेरोजगारी है उन्होनें कहा की जिले में कई बड़े बड़े सेट साहूकार दिग्गज हस्तियो के द्वौरा लगातर गरीबों के नाम पर राजनीति की जाती है, कई लोगों की रोजी रोटी गरीबी दूर करने का नारा लगाते हुए ही चलती रहती है। राजनेता हो या विभिन्न सामाजिक संस्था वाले गरीबी पर गला फाड़ कर चिल्लाते तो जरूर हैं लेकिन इससे गरीबों की गरीबी दूर नहीं होती। इन सब के बीच गरीब आदमी गरीबी में हमेशा पिसाता चला जाता है। उन्होनें कहा की यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश में कोरोना के बाद की सबसे बड़ी महामारी गरीबी और बेरोजगारी रहेगी।
सायद यही कारण है की अब गरीब परिवार के अलस्या सोलंकी गरीबी और बेरोजगारी जैसी महामारी को दूर करने राजनीतिक गलियारों में अपनी भुमिका अदा करने का मन बना रहे है । हालाकी अभी तक उन्होनें इस संबंध में खुल कर कोई प्रतिक्रिया जाहिर नही की है।