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भवसागर से पार उतारते है गुरुदेव-कौशलेन्द्र शास्त्री

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ब्यूरो रिपोर्ट

आषाढ़ के महीने में आने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता है. धार्मिक मान्यता ऐसी है कि वेदों के रचयिता वेद व्यास जी का जन्म इसी तिथि को हुआ था. इसी वजह से इसी तिथि को वेद व्यास जन्मोत्सव भी कहा जाता है. गुरु पूर्णिमा के दिन वेद व्यास की पूजा की जाती है. इस वर्ष गुरु पूर्णिमा का परम् पावन पर्व 04 जुलाई, दिन सोमवार को मनाया जा रहा है. इस दिन गुरुओं का सम्मान और पूजन किया जाता है इस दिन गुरु दर्शन गुरु पूजन गुरु का मान सम्मान आदि करने की विशेष परंपरा सदियों से रही है महर्षि वेदव्यास का नाम कृष्ण द्वैपायन भी था जो द्वापर के अंत में वेद और पुराणों की रचना आपने ही की थी आप ने वैदिक शास्त्रों को लेकर बहुत ही परिश्रम किया आषाढ़ माह की पूर्णिमा पर व्रत-उपवास का भी विशेष महत्व है और कहा जाता है कि यह व्रत बिना कथा के पूर्ण नहीं होता. जो जातक व्रत करते हैं उन्हें इस दिन कथा अवश्य पढ़नी व सुननी चाहिए इस दिन तीर्थ स्नान दर्शन पूजन का बड़ा महत्व है जो भक्त अपने गुरु का दर्शन वर्षभर नहीं कर पा रहे हैं वह भी आज के दिन गुरु का दर्शन करके उनका पैर प्रक्षालन करके वस्त्र आभूषण से सज्जित करके उनका पूजन करके माला पहनावे चंदन टीका इत्यादि करें तत्पश्चात मीठा फल इत्यादि गुरु के चरणों में अर्पित करके गुरु से आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त करते है उनका मानना है कि गुरु ही इस संसार रूपी भवसागर से पार उतार सकते हैं जो भक्त गुरु दीक्षा नहीं लिए हैं उनको इस दिन गुरु दीक्षा लेने की भी बात कही गई है ज्यादा से ज्यादा भक्त आज के ही दिन गुरुदीक्षा प्राप्त करके अपने आप को धन्य बनाते हैं वैसे जीवन में गुरु का होना बड़ा ही महत्व शास्त्रों में बताया गया है कि गुरु बिन ज्ञान कहां जीवन तो चलता रहता है लेकिन जैसे एक मोटर कार बिना ड्राइवर के चलती है वैसे ही हमारा जीवन गुरु के बिना बेकार ही है