अच्छे विचार है तो झोपड़ी में भी मिलेगा सुख-कौशलेन्द्र शास्त्री

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आरसिया बाजार के सन्निकट स्थित ग्राम विग्धरिया में चल रहे श्रीमदभागवत कथा के प्रथम दिन सोमवार को कथावाचक आचार्य कौशलेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी महराज ने कथा महात्म्य का वर्णन कर श्रोताओं को ओतप्रोत कर दिया। उन्होंने कहा कि जब स्वयं की ओर से किये गये कर्मों का अभिमान नष्ट होता है, तभी भगवान की कथा में रुचि होती है। भगवान में भक्तों का पूर्ण समर्पण होना चाहिए।

साधन तत्व का अभिमान छोड़कर जब मनुष्य ईश्वर से जुड़ जाते हैं, तभी कल्याण होता है। महराज श्री ने कहा कि सृष्टि में जितने भी भौतिक संसाधन है। वे केवल मनुष्य की व्यवस्था है जो सुख नहीं दे सकती। क्योंकि धन से मनुष्य भौतिक सुख प्राप्त कर सकता है किन्तु सत्य पर विचार नहीं प्राप्त कर सकता। अच्छे विचार हैं तो झोपड़ी में भी सुख है। यदि विचार व कर्म शास्त्रानुसार नहीं है तो महलो में भी सच्चा सुख व शान्ति नहीं है। कथा में भारी संख्या में आये हुए श्रोताओं का स्वागत अजीत सिंह,सत्य कुमार,प्रदीप,आनंद,अभिषेक, अविनाश द्वारा किया गया। मौके पर मुख्य यजमान सुभाष सिंह और यज्ञाचार्य विपिन शास्त्री,बब्लू पाठक,भूपेन्द्र आदि भी रहे।

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