“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं ” पर बट्टा और अनियमितता पर स्कूल की मान्यता रद्द कराने सड़कों पर उतरी NSUI

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शारदा श्रीवास मंडला 

मंडला -मंडला के एक स्कूल द्वारा सरकार की  करोडो की महत्वाकांक्षी मुहिम “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान” पर बट्टा और  मानवीय संवेदनाओं  को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है , जहाँ एक मासूम छात्रा को संरक्षण देने के बदले स्कूल  प्रबंधन अपनी गलतियों पर पर्दा डाल   गैर जिम्मेदाराना  व्यवहार करता नजर आया है।  मामले में छात्र संगठन NSUI ने स्कूल पर भारी अनियमितता और स्कूली छात्रा के साथ भेदभाव अपनाने के आरोप लगते हुए , प्रदर्शन किया एवं स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की है।

बताया जा रहा है कि विगत दिनों भारत ज्योति हायर सेकेंड्री स्कूल में  पहले कक्षा तीसरी की बालिका को स्कूल के सातवी कक्षा के कुछ लड़कों द्वारा टीचर के कहने से मारा गया था।  जिससे बालिका को गुप्तांग में गंभीर चोट आई थी। जिसकी  परिजनों के द्वारा स्कूल प्रबंधक और मण्डला कोतवाली पुलिस से  लिखित शिकायत दर्ज कराई  थी।

किन्तु उल्टा स्कूल प्रबंधक द्वारा कारवाही करने के गैरज़िम्मेदाराना  तरीके से बालिका के परिजनों को कहा गया कि “आपको तकलीफ है  तो आप अपने बच्चे को हमारे स्कूल मत भेजो ” और घर से ही पढ़ाई करा कर केवल परीक्षा देने स्कूल ले कर आओ , बच्ची को गंभीर चोट थी तो परिजनों ने घर मे ही पढ़ा कर बच्ची को परीक्षा के लिये स्कूल भेज परीक्षा दिलवाई। मगर स्कूल प्रबंधन ने बच्ची के साथ भेद भाव कर अर्धवार्षिक परीक्षा में भी कम अंक दिया ।
जब कॉपी की जाँच कराई गई तो बच्ची के अंक अधिक निकले ।

स्कूल में टीचर के द्वारा बच्ची को जानबूझ कर कक्षा तीसरी की बच्ची को पिटवाया गया और परिजनों को डरवाया जा रहा है कि आप पुलिस से शिकायत वापस ले ले नही तो आपकी बच्ची को फेल कर देंगे।
जब इस बात की जानकारी NSUI के कार्यकर्ताओं को चली तो उन्होंने बच्ची के परिजनों से मिल पूरी जानकारी ली और बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट को लेकर आज मण्डला  कलेक्ट्रेड के सामने प्रदर्शन किया।  तथा नारेबाजी करते हुए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से  भारत ज्योति स्कूल की मान्यता रद्द करने और दोषियों पर कार्यवाही की जाए को लेकर ज्ञापन सौपा । एवं पुरे मामले की जांच की मांग की है।

गौरतलब है कि “सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं” अभियान तो  जोर शोर से चला रही है , लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। स्कुल की मान्यता रद्द करना विकल्प नहीं है। जरुरत है ऐसे मानसिकता के लोगों पर कड़ी कारवाही हो। ताकि फिर कोई मासूम डर के साये में न रहे और निर्भीक हो कर सरकार की मंशानुरूप शिक्षा प्राप्त कर सके। तभी अभियान भी सार्थक होगा।

 

 

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