मध्यांचल बैंक दलालों के घेरे में नहीं कर रहे फिक्स्ड डिपॉजिट का भुगतान , ग्राहकों ने लगाये मनमानी के आरोप

Scn news india

प्रद्युमन फौजदार
बड़ा मलहरा/नगर में संचालित मध्यांचल ग्रामीण बैंक में पदस्थ कर्मचारियों और अधिकारियों की मनमानी से ग्राहक खासे खफा है। ग्राहकों का आरोप है कि बगैर दलालों के बैंक अधिकारी काम नहीं करते और तो और रिजर्व बैंक के नियम न मानना और बेवजह परेशान करना बैंक अधिकारियों की आदत में शुमार हो गया है। वैश्य महासभा के महासचिव एवं युवा व्यवसायी निखिल जैन लकी ने आरोप लगाते हुये बताया कि नगर में कोई प्राइवेट बैंक नही होने के कारण मध्यांचल बैंक के अधिकारियों की मनमानी जोरों पर है। यहां न तो बैंक के कोई लिखित नियम हैं न ही कोई कानून, अगर कुछ है तो वो है दलालों का बोलबाला।
अनियमितता तो इतनी है कि हर काम की कीमत भी तय हैं।
अगर बैंक अधिकारी मेहरबान हों और खाता खोलना हो तो कोई नियम नहीं है और जिसका खाता नहीं खोलना है तो उसके लिए इतने कानून हैं कि जैसे वो बैंक में खाता खोलने नहीं बैंक को लूटने आया हो, पहले तो बैंक के नियम के हिंसाब से खाता खोलने का फार्म ही नहीं दिया जाता फिर अगर मेहरबानी से फार्म की जुगाड़ भी लग जाये तो खाता खोलने के लिए इतने दस्तावेज़ बताए जाते हैं कि जिंदगी में दस्तावेज ही न जुटा पाए अगर दस्तावेज भी पूरे हो जाये तो फिर बैंक अधिकारियों के मूड के हिसाब से कुछ नियम अलग से हैं कभी बिना शपथपत्र (अन्य बैंक में खाता नहीं है) तो कभी बिना जीएसटी के खाता नहीं खोलते, जबकि ऐसा कोई नियम नहीं कि जिसका एक बैंक में चालू खाता हो तो वो किसी दूसरे बैंक में खाता नहीं खोल सकता। निखिल जैन ने आरोप लगाते हुये कहा कि जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए भी नियम है कि यदि किसी व्यापारी की फर्म का टर्नओवर 40 लाख से अधिक होना चाहिए। अगर टर्नओवर 40 लाख से कम है तो उसे जीएसटी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होता। लेकिन बैंक के अधिकारियों को इससे कोई मतलब नहीं है, बैंक अधिकारी अपनी मनमर्जी से खाते खोलते है।मध्यांचल बैंक बड़ामलहरा के ग्राहक निखिल जैन ने यह भी बताया कि अपनी 10 साल पुरानी फिक्स डिपॉज़िट (परिपक्वता राशि लगभग 2 लाख) भुनाने के लिए विगत 3 महीने से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी फिक्स डिपॉज़िट का भुगतान नहीं किया जा रहा है। इसी सिलसिले में जब निखिल अपनी शिकायत लेकर बैंक पहुंचे तो फील्ड ऑफिसर कपिल रैकवार द्वारा उन्हें अपमानित कर केबिन से बाहर जाने तक को कह दिया गया।लकी ने इस बात को लेकर गहरा अचरज व्यक्त करते हुये और सवाल उठाते हुये कहा कि जब उनका मध्यांचल ग्रामीण बैंक में लाखों का लेनदेन होने के बाबजूद ऐसा बर्ताव किया जाता हो तो गाँव के गरीब और भोलीभाली जनता का क्या हाल होता होगा। लकी ने कहा कि एक तरफ सरकार हर व्यक्ति को शासन की योजना का लाभ पहुंचाने बैंक में खाता खोलना अनिवार्य कर बैंकों से जोड़ना चाहती है तो दूसरी तरफ बैंक के अधिकारियों की मनमानी, कठोर रवैये तथा दलालों की सक्रियता के चलते ग्राहकों को परेशान कर उन्हें बैंक से बाहर जाने का रास्ता दिखा रहे हैं।बैंक के रवैये से क्षुब्ध निखिल जैन ने बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से बडामलहरा बैंक प्रबंधन की शिकायत भी की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.