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अंतिम दिन पहुंचे चार लाख से अधिक श्रद्धालु

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 बैतूलवासियों को जरुर मिलेगा सेवा का फल, ऐसी सेवा न भूतो न भविष्यति : पं. प्रदीप मिश्रा
 बैतूल में चल रही मां ताप्ती शिवपुराण कथा का हुआ समापन
बैतूल। बैतूलवासियों ने यह साबित कर दिया कि वे प्रेम और भक्ति में सब कुछ कर सकते हैं। इस कथा को सुनने आने वाले भक्तों की उन्होंने जिस आदर व सम्मान के साथ सेवा की, बार-बार बारिश के बावजूद कुछ ही घंटों में जिस तरह फिर से व्यवस्था कर ली, विभिन्न समाज और संगठन रात-दिन सेवा में जुटे रहे, यहां तक कि छोटे-छोटे काम-धंधे करने वालों ने 7 दिन काम-काज बंद रख सेवा की… ऐसी सेवा न भूतो न भविष्यति। उन्होंने साबित कर दिया कि यह कथा राजनीति की नहीं बल्कि पूरे बैतूल की जान की कथा है। बैतूलवासियों को देवाधिदेव महादेव इस सेवा का फल जरुर देंगे।
यह आशीर्वाद प्रख्यात कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा जी ने बैतूल में चल रही मां ताप्ती शिवपुराण कथा के समापन पर बैतूलवासियों को दिया। पं. मिश्रा ने कहा कि किसी के घर शादी जैसा कार्यक्रम हो और पानी आ जाए तो पसीना छूट जाता है, व्यवस्थाएं ध्वस्त हो जाती हैं, यहां 2 बार पानी आया। दोबारा व्यवस्थाएं करने को पर्याप्त समय तक नहीं था। इसके बावजूद यहां पसीना नहीं छूटा बल्कि प्रेम टपका। यहां की व्यवस्थाएं जरा भी नहीं बिगड़ी। भोजन कराने सभी ने अपने खजाने खोल दिए, योगदान दिया। इतनी भक्ति और कहां देखने को मिलेगी। यहां जो प्रेम दिखा वह देखने के लिए अगला जन्म लेना होगा। यह बैतूलवासियों के शिव पर भरोसे का प्रताप है। यही शिवत्व है। आखिर साबित हो गया कि वो जब हाथ पकड़ता है तो छोड़ता नहीं। इसलिए किसी आडंबर और प्रपंच में पड़ने के बजाय बस शिव पर भरोसा करते रहे। हम पानी में डूबेंगे तो मरेंगे, लेकिन शिव महापुराण में डूबेंगे तो तर जाएंगे। भगवान की भक्ति के साथ कर्म भी करते जाओ, फल जरुर मिलेगा।
चार लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे
आयोजन समिति के सह संयोजक द्वय आशु किलेदार और योगी राजीव खंडेलवाल ने बताया कि मां ताप्ती शिवपुराण समिति के तत्वावधान में विगत 12 दिसंबर से शिवधाम किलेदार गार्डन कोसमी में यह आयोजन जारी था। इसका आज समापन हुआ। समापन दिवस पर चार लाख से अधिक श्रद्धालु कथा में शामिल हुए। इन श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण करने के पश्चात भंडारे में प्रसादी ग्रहण की। आखरी दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब ही उमड़ पड़ा। समापन दिवस की आरती पूर्व विधायक अलकेश आर्य, प्रमोद अग्रवाल, रजक समाज के प्रतिनिधि गण, आदिवासी समाज के प्रतिनिधि गण, पवन यादव, योगेंद्र पंवार, विवेक मालवीय, रंजीत शिवहरे, लट्टू अग्रवाल, दिनेश महस्की, पंकज साबले, अन्नू जसूजा, तपन (मोनू) खंडेलवाल, अभिषेक गोयल, मनीष सोलंकी, शक्ति अग्रवाल आदि के द्वारा की गई।
आयोजन समिति ने माना सहयोगियों का आभार
आयोजन समिति ने इस विराट आयोजन के सभी सहयोगियों का आभार माना है। समिति के सुनील द्विवेदी, बबलू ख़ुराना, राजेश आहूजा, नारायण पवार व अन्य ने कहा कि यदि सभी का सहयोग प्राप्त नहीं होता तो केवल समिति द्वारा यह आयोजन करा पाना संभव नहीं होता। आयोजन समिति के सह संयोजक द्वय आशु किलेदार और योगी राजीव खंडेलवाल सहित समिति के सभी सदस्यों ने इस आयोजन की व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए सभी शासकीय विभागों, अधिकारियों-कर्मचारियों, प्रशासन, पुलिस विभाग, सभी समाज व संगठनों, व्यक्तिगत रूप से सेवा करने वाले सेवाभावियों का हृदय से आभार व्यक्त किया है।
शरीर से नहीं मन से जाएं महादेव के पास
आज की कथा में पं. मिश्रा जी ने कहा कि भगवान की भक्ति करके हम मोक्ष रूपी अमृत प्राप्त कर सकते हैं। संसार सागर में जन्म लेना आसान है, लेकिन यहां से बिना कोई दाग लगाए वापस जाना कठिन है। हम इंद्रियों को वश में कर परमात्मा तक जा सके, भक्ति कर सकें तो महादेव की कृपा जरुर प्राप्त होगी। मन बड़ा चंचल होता है। यह मंदिर तक तो चला जाता है पर भक्ति में भी लगा रहे तो भगवान जरुर कुछ देगा। मंदिर में जाओ तो नैनों को टकटकी लगाकर भगवान को देखने में डूब जाओ, भगवान की भक्ति में डूब जाओ तो जरुर वो फल देगा। भरोसा है तो परमात्मा है, भरोसा नहीं है तो परमात्मा नहीं है। मानों तो नदी भी मां होती है नहीं तो नदी तो है ही।
कष्ट आए तो परमात्मा के दर पर जाएं
पं. मिश्रा जी ने आगे कहा कि जीवन में जब भी कष्ट आएं, लगातार बीमारी आते रहे तो परमात्मा के दर पर जाएं, उसे बेल पत्र चढ़ाएं, जल चढ़ाएं। बीमारी से मुक्ति के लिए हरिओम जल चढ़ाएं। उन्होंने हरिओम जल की विस्तार से जानकारी दी साथ ही बेलपत्र चढ़ाने का तरीका भी बताया। उन्होंने बताया कि यह हरिओम जल रोग और कष्ट निवारण के लिए होता है। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए भी यह चढ़ा सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने पशुपति व्रत की महिमा और इसे करने की विधि भी विस्तार से बताई।
जल चढ़ाने में बिल्कुल न करें छल
पं. मिश्रा जी ने कहा कि जल चढ़ाने में छल बिल्कुल न करें। किसी को नुकसान पहुंचाने, कष्ट देने, परेशान करने के लिए जल न चढ़ाएं। स्वयं की कोई कामना पूरी करने के लिए जल चढ़ाएं और पूरे विश्वास के साथ चढ़ाएं। ऐसा करेंगे तो जो मांगोगे, वह मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब भी दुख हो तो अपने घर का जल लें और मंदिर जाकर चढ़ावों। मंदिर का ही जल लेकर कभी नहीं चढ़ाना चाहिए क्योंकि दुख और तकलीफ आपके घर की है। भोले के लिए चावल का एक दाना और एक लोटा जल भी पर्याप्त है बस वह मन और विश्वास से चढ़ाना चाहिए। भोले कभी नहीं कहते कि 24 घंटे माला जपते रहो, वे कहते हैं कि बस एक क्षण के लिए मेरे पास आना, प्रेम से मुझसे निगाह मिलाना। इतना भर करने से मैं तेरा हो जाउगा और तू मेरा हो जाएगा।