अमेरिकन गेम बेस बॉल में आदिवासी बालिकाओ ने दिखाए जौहर,इंदौर -सागर के दांत किये खट्टे

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ब्यूरो रिपोर्ट भोपाल

नर्मदापुरम -होशंगाबाद में  66वीं राज्य स्तरीय शालेय बेसबॉल प्रतियोगिता सम्पन्न हुई  । प्रतियोगिता का आयोजन  10 नवंबर से 13 नवंबर तक किया गया  । अमेरिकन गेम बेस बॉल की इस प्रतियोगिता में इस बार आदिवासी अंचल बैतूल से पहली बार  24 छात्राओं ने भाग लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन किया । जानकारी देते हुए खेल  प्रशिक्षक कैलाश वराठे ने बताया कि जनजाति कार्य विभाग सहायक आयुक्त बैतूल के मार्गदर्शन में  नर्मदापुरम  में  आयोजित 66 वीं राज्य स्तरीय शालेय बेसबॉल प्रतियोगिता में पहली बार बैतूल जिले की   14  एवं 17  वर्ष आयु वर्गों की आदिवासी बालिकाओ ने भाग लिया था। और  इंदौर व सागर को टक्कर देते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।  वर्ग ग्रुप 14 की बालिकाओ ने इंदौर से और 17 की बालिकाओं ने सागर को कड़ी टक्कर दी। दोनों ही ग्रुप की बालिकाओं ने जबरदस्त खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए मैच में बराबरी पर रही।

जनजाति कार्य विभाग की पहल पर ये पहली बार हुआ की अमेरिकन गेम बेस बॉल में आदिवासी अंचल की बालिकाओं ने भाग लिया। जिसमे जनजाति कार्य विभाग बैतूल सहायक आयुक्त शिल्पा जैन का बड़ा योगदान रहा। जिन्होंने 60 दिनों से भी कम समय में उपर्युक्त संसाधन उपलब्ध करा बालिकाओं को खेल की बारीकियों का प्रशिक्षण दिलाया। और राज्य स्तर पर प्रतिभा निखारने का अवसर उपलब्ध कराया। वही खेल प्रशिक्षक एवं समन्वयक चेतन सिरके व खेल प्रशिक्षक कैलाश वराठे द्वारा  इन्हे प्रशिक्षण दिया।

बता दे कि बेस बॉल खेल अमेरिकन खेल है। जो 1846 में इंग्लैंड में सबसे पहले खेला गया था, लेकिन इसको वास्तविक रूप कुछ परिवर्तन के साथ उत्तरी अमेरिका ने दिया। 19वीं शताब्दी के अंत में यह संयुक्त राज्य अमेरिका का नेशनल गेम बन गया। बेसबॉल तब उत्तरी अमेरिका, सेंट्रल और दक्षिण अमेरिका, केरेबिया और ईस्ट एशिया में खूब खेला जाता था।

यदि इन बच्चों उपर्युक्त संधाधन और समुचित खानपान के साथ उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाता है तो ये आदिवासी अंचल की प्रतिभाएं राष्ट्रीय मंचों पर ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर विदेशी  खिलाड़ियों के दांत खट्टे कर बैतूल की माटी का अपना लोहा मनवा सकती है।