गीता के सार में है जीवन की खुशियों का आधार: ब्रह्माकुमारी वीणा दीदी

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– ब्रह्माकुमारीज ब्लेसिंग हाउस सहस्त्रबाहु नगर में हुआ गीता प्रवचन का आयोजन।

भोपाल।

गीता में जीवन की खुशियों का सार समाया हुआ है। गीता में वर्णित युद्ध के माध्यम से यह शिक्षा मिलती है कि हम एक आत्मा रूपी चैतन्य शक्ति है जो इस शरीर रूपी रथ पर विराजमान है। पांच कर्मेन्द्रियों रूपी घोड़े यदि हमारे अनुसार चलते हैं तो हमारा जीवन खुशियों से भर जाता है। परमात्मा को यदि सारथी बनाकर कर्मेन्द्रियों रूपी घोड़ों की लगाम दे दी जाए तो व्यक्ति विषम परिस्थितियों के ऊपर विजय प्राप्त की जा सकती हैं।

निराकार परमात्मा ने की है इस विश्व विद्यालय की स्थापना-
सेवाकेंद्र प्रभारी बीके डॉ. रीना दीदी ने कहा कि विश्व विद्यालय उसे कहा जाता है जहां सारे विश्व के इतिहास अर्थात् यहां दैवी-देवताओं का राज्य कब होता है, कैसे होता है। भूगोल अर्थात सृष्टि के चारों चक्रों का ज्ञान बताया जाए, उसे विश्व विद्यालय कहते हैं। ब्रह्माकुमारी विश्व विद्यालय की स्थापना स्वयं निराकर परमात्मा ने की । इस यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने वाले और पढऩे वाले भाई बहनों को ब्रह्माकुमार और ब्रह्माकुमारी कहते हैं।

भगवान कहते हैं सृष्टि के अंत में मैं ऐसा यज्ञ रचता हूं जिसमें देवी-देवता बनने की शिक्षा दी जाती है। भगवान ने गीता में कहा है कि जिसके कर्म ब्रह्मा के समान अर्थात् ब्रह्मचर्य का पालन करने वाला, ब्रह्म को जानने वाला हो, वही सच्चा ब्राह्मण है। यह ज्ञान यज्ञ स्वयं परमपिता परमात्मा द्वारा स्थापित अविनाशी रुद्र गीता ज्ञान यज्ञ ही है।

कार्यक्रम में हेमराज भाई ने स्वागत उद्बोधन दिया।

कुमारी श्री, कुमारी पूजा, कुमारी आरती , कुमारी राधा ने सुंदर नृत्य के माध्यम से गीता ज्ञान का संदेश सभी उपस्थितों को दिया।