चित्रकूट और मैहर भी विकास के हैं हकदार : नारायण त्रिपाठी

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कामता तिवारी
संभागीय ब्यूरो रीवा
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सतना-मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने जारी बयान में कहा है कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के धार्मिक स्थलों का विकास व विस्तार कर इन्हें सुंदर व भव्य बनाने का कार्य किया जा रहा है। कल भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में भव्य महाकाल लोक को दुनिया को समर्पित किया गया। इससे पूरे देश-प्रदेश के लोग भगवान शिव की लीलाओं और अलौकिक स्वरूप को जीवंत देख सकेगें। इस सौगात व महाकाल मंदिर को दिव्य स्वरूप दिये जाने से प्रदेश की जनता अभिभूत है। इस हेतु प्रधानमंत्री का हृदय से आभार प्रकट करता हूॅं। कल के उद्बोधन में प्रधानमंत्री ने चारोंधाम व अयोध्या, वाराणसी की विकासगाथा का उल्लेख किया। दुनिया भर के सनातनियों के आस्था के केन्द्र चारोंधाम और भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या और वाराणसी के धार्मिक स्थलों का विकास-विस्तार जरूरी है। हर कोई चाहता है कि उनके आराध्य देवताओं से जुड़े स्थल भव्य और दिव्य बनें। देश में धार्मिक स्थलों के विकास को लेकर अब तक किये गये कार्यों के लिये प्रधानमंत्री की इच्छाशक्ति, उनके संकल्प और प्रयासों की चारों ओर सराहना हो रही है। मैं भी इस हेतु उनको नमन करता हूॅं। मुझे दुःख इस बात का है कि कल मध्यप्रदेश की धरती पर उज्जैन में आयोजित महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के उद्बोधन में भगवान राम की तपोभूमि परमधाम चित्रकूट का उल्लेख नहीं हुआ। हमारे विन्ध्य के सतना जिले में स्थित इस पवित्र तपोभूमि में भगवान राम ने साढ़े ग्यारह साल का समय बिताया, तपस्या की, ऋषिमुनियों की रक्षा की और इसी धरती पर आकर राजकुमार राम मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम बने, इसी धरती पर महाकवि तुलसीदास ने श्रीरामचरित मानस की रचना की। श्रीराम की तपोभूमि परमधाम चित्रकूट आज विकासगाथा से कोसों दूर है, खनन माफिया द्वारा भगवान राम व ऋषि मुनियों की स्मृतियों के समीप खनन कर इन्हें नष्ट करने के प्रयास किये जा रहे हैं, लाखों धार्मिक श्रद्धालुओं के आस्था के केन्द्र चित्रकूट को सरकारें अब तक तीर्थस्थल घोषित नहीं कर सकी हैं, सरकारी बेरूखी के कारण यहां बड़ी संख्या में स्थित रामायणकालीन स्थल, आश्रम विकास व सुविधा विस्तार के इंतजार में हैं। यहां की वनस्पति, वन संपदा के संरक्षण के उपाय भी शून्य है। 52 शक्तिपीठों में से एक मैहर स्थित मॉं शारदाधाम भी सरकारी विकासगाथा से दूर है, प्रदेश में देशी धार्मिक पर्यटकों के सर्वाधिक आकर्षण के केन्द्र मैहर और चित्रकूट भी बनारस, अयोध्या और उज्जैन की तरह विकास के हकदार हैं। मैहर में आज भी आल्हा की अमरता के प्रमाण मिलते हैं, प्रदेश में सबसे ज्यादा धार्मिक यात्री मैहर आते हैं, फिर भी मां शारदा मंदिर और नगर के विकास, यात्री सुविधाओं के विस्तार व सौंदर्यीकरण के कार्यों में बहुत पीछे है। रामवन गमन पथ, परमधाम चित्रकूट और मॉं शारदा की नगरी मैहर भी अपने सर्वांगीण विकास के लिये सरकारी प्राथमिकता में आने की प्रतीक्षा कर रही है। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रदेश के मुखिया शिवराज चौहान से मेरी प्रार्थना और विनती है कि विन्ध्य की धरा के इन दोनों पावनस्थलों के विकास की रूपरेखा अयोध्या, बनारस और उज्जैन जैसे ही बनाकर मूर्तरूप दें। प्रधानमंत्री से मेरा आग्रह और निवेदन है कि यदि आप संकल्प ले लेगें, तो निश्चित ही तपोभूमि चित्रकूट और मां शारदाधाम मैहर विश्व मानचित्र पर स्थापित हो जायेंगे। इन पवित्र धार्मिक स्थलों के विकास से यहां रोज आने वाले हजारों धार्मिक तीर्थयात्रियों को सुविधायें व आनंद प्राप्त हो सकेगा और उन सबका आशीर्वाद और पुण्य हम सबको मिलेगा।