ड्रग्स और नशे के अवैध व्यापार को ध्वस्त करना हमारा कर्त्तव्य भी और धर्म भी– मुख्यमंत्री श्री चौहान

Scn news india

मनोहर

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि नशे के जहर से समाज को बचाने और नशे से व्यक्तियों में विकसित हो रही दुष्प्रवृत्तियों पर नियंत्रण के लिए नशे के अवैध कारोबार की जड़ों पर प्रहार जरूरी है। ऐसे अपराधियों को ध्वस्त करें। खुले में शराब पीने, शराब पीकर हुड़दंग करने और वाहन चलाने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती है। गत दो दिवस में नशे के अवैध व्यापार पर की गई प्रभावी कार्यवाही के लिए पुलिस प्रशासन बधाई का पात्र है। यह पवित्र अभियान है। बिना गड़बड़ी के नशे की अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्यवाही निरंतर जारी रहे। अभियान की आड़ में कोई वसूली शुरू न हो। पक्षपात करने और भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर पुलिस प्रशासन के अधिकारीकर्मचारियों पर ईओडब्ल्यू द्वारा कार्यवाही की जाए। नशे के कारोबारी और माफियाओं को किसी भी स्थिति में छोड़ा नहीं जाएगा, यह हमारा संकल्प है। मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रदेश में नशे के विरूद्ध जारी अवैध व्यापार के राज्य स्तरीय अभियान के संबंध में सुबह 7.30 बजे वर्चुअली समीक्षा कर रहे थे। निवास कार्यालय में हुई बैठक में पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना, ईओडब्ल्यू के एडीजी श्री अजय शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा तथा सभी संभागों और जिलों के पुलिस प्रशासन के अधिकारी वुर्चअली सम्मिलित हुए।

पुलिस महानिदेशक श्री सुधीर सक्सेना ने बताया कि प्रदेश में त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी हुक्का बार बंद करा दिए गए हैं। इंदौर, भोपाल और ग्वालियर में विशेष रूप से कार्यवाही की गई है। गत दो दिवस में एन.डी.पी.एस. एक्ट में 189 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। अवैध शराब के विरूद्ध 2 हजार 589 प्रकरण दर्ज कर 16 हजार 600 लीटर अवैध शराब जप्त की गई। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने के 163, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने के 335 तथा शराब पीकर वालन चलाने के 200 प्रकरण बनाए गए हैं। नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार से संबंधित 1700 और अवैध शराब से संबंधित 2 हजार 486 संदिग्ध स्थानों पर छापे मारे गए हैं। बताया गया कि नशे के विरूद्ध जागरूकता के लिए स्कूल, कॉलेज सहित सोशल मीडिया और विभिन्न प्रचार माध्यमों पर गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं। कोटपा अधिनियम में संशोधन के लिए प्रारूप बनाया गया है।